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धन से भरे मंदिरों से अपना कब्जा छोड़े सरकार : स्वामी जितेंद्रानंद

Sun, 06 Jun 2021 01:39 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jun 2021 01:39 AM IST
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Government should give up its possession of temples full of money: Swami Jitendranand
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि अल्पसंख्यक वोट की राजनीति में छोटे मंदिरों के पुजारी और सेवादारों को दरकिनार कर दिया गया है। कोरोना संक्रमण काल में मौलवी और पादरियों को वेतन मिल रहा है, लेकिन पुजारी और सेवादार बेहाल हैं। देश की सरकार और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों से अखिल भारतीय संत समिति मांग करती है कि या तो वह धन से भरे मंदिरों से अपना कब्जा छोड़ दें और उन्हें हमें पुन: सौंप दें। ताकि हम छोटे मंदिरों के पुजारियों और सेवादारों का खर्च उठा सकें। या फिर छोटे-बड़े सभी मंदिरों के पुजारियों और सेवादारों के बारे में भी सोचकर उनके लिए भी कुछ सार्थक करें।
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शनिवार को स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि कोरोना वायरस की दूसरी लहर में देश के मठ और छोटे मंदिर बंद हैं। बड़े मंदिरों पर सरकारों का कब्जा है। ऐसे में सरकार यह बताए कि इन छोटे मठ-मंदिरों के पुजारी और सेवादार अपना और अपने परिजनों का पेट कैसे भरें। जब मंदिर में श्रद्धालु आएंगे नहीं और चढ़ावा चढ़ेगा ही नहीं तो पुजारी और सेवादार क्या करें। इनके बारे में भला कौन सोचेगा? इनका परिवार कैसे पलेगा? स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 करोड़ लोगों के परिवारों की चिंता की, लेकिन इन पुजारियों और सेवादारों के बारे में किसी ने नहीं सोचा। अल्पसंख्यक वोटों की राजनीति के लिए चर्च के पादरियों और मस्जिदों के मौलानाओं के वेतन की चिंता सभी करते हैं। इनके वेतन की चिंता करने वालों ने क्या यह पता लगाने का कष्ट किया कि पुजारियों और सेवादारों के घरों का खर्च कैसे चल रहा हैं? कोई पुजारी या सेवादार लखपति या करोड़पति नहीं है, जो घर बैठकर अपने परिवार का खर्च उठा सकता है। कहा कि सरकार सनातन धर्म के सब्र की परीक्षा न लें।
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