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पूर्वांचल विवि में बोले राज्यपाल राम नाईक, विश्वविद्यालय शोध कराने की फैक्ट्री न बने
ब्यूरो, अमर उजाला, जौनपुर
Updated Sat, 28 Oct 2017 07:13 PM IST
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पूर्वांचल विश्वविद्यालय में संबोधित करते राज्यपाल
- फोटो : अमर उजाला
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किसी भी देश की प्रगति में वहां की शिक्षा पद्धति का विशेष योगदान होता है। यह हमारा सौभाग्य है कि हमारे पास युवाओं की सबसे बड़ी पूंजी है। संख्या शास्त्र बताता है कि 2025 में भारत विश्व का सबसे बड़ा युवा शक्ति वाला देश होगा। शिक्षा के जारिए युवाओं का भरपूर उपयोग करने की जरूरत है।यह काम शिक्षा संस्थान ही कर सकते हैं।
ये बातें कुलाधिपति व राज्यपाल राम नाईक ने शनिवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में पं. दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में संगोष्ठी भवन में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय शिक्षा पद्धति विषयक तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन पर बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
उन्होंने कहा कि संगोष्ठी का विषय प्रासंगिक और उपयोगी है। ऐसे में जो भी विचार आएं, उसके नतीजे से मुझे अवगत कराएं ताकि उस पर अमल कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शोध कराने की फैक्ट्री न बने। इसकी जगह उसे शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।
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विशिष्ट अतिथि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश चंद्रा ने कहा कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था बदलाव के राह पर है। हम विश्व में टॉप फाइव पर आने के इच्छुक हैं। इसके लिए हमें कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।
विशिष्ट अतिथि कार्य परिषद के सदस्य डा. दीनानाथ सिंह ने कहा कि शिक्षा मन का भाव है। जब मन में सार्थक भाव आता है तो सृष्टि होती है। दीनदयाल उपाध्याय को उन्होंने मनीषी बताते हुए कहा कि प्रतिभाशाली छात्र होते हुए भी वह अपनी सारी डिग्रियों को जला कर देश के पुनर्निर्माण में लग गए।
शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिबद्धता के लिए संवाद का होना जरूरी है, नहीं तो उसके मूल्य मर जाएंगे। कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहा कि यह विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियों को अर्जित कर रहा है। देश का यह पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जहां शोध की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने अपने स्रोत से पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप की व्यवस्था की है।
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ये बातें कुलाधिपति व राज्यपाल राम नाईक ने शनिवार को वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में पं. दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में संगोष्ठी भवन में आयोजित भारतीय विश्वविद्यालय शिक्षा पद्धति विषयक तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन पर बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
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उन्होंने कहा कि संगोष्ठी का विषय प्रासंगिक और उपयोगी है। ऐसे में जो भी विचार आएं, उसके नतीजे से मुझे अवगत कराएं ताकि उस पर अमल कर सकें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शोध कराने की फैक्ट्री न बने। इसकी जगह उसे शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।
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विशिष्ट अतिथि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश चंद्रा ने कहा कि पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था बदलाव के राह पर है। हम विश्व में टॉप फाइव पर आने के इच्छुक हैं। इसके लिए हमें कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।
विशिष्ट अतिथि कार्य परिषद के सदस्य डा. दीनानाथ सिंह ने कहा कि शिक्षा मन का भाव है। जब मन में सार्थक भाव आता है तो सृष्टि होती है। दीनदयाल उपाध्याय को उन्होंने मनीषी बताते हुए कहा कि प्रतिभाशाली छात्र होते हुए भी वह अपनी सारी डिग्रियों को जला कर देश के पुनर्निर्माण में लग गए।
शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिबद्धता के लिए संवाद का होना जरूरी है, नहीं तो उसके मूल्य मर जाएंगे। कुलपति प्रो. राजाराम यादव ने कहा कि यह विश्वविद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में अनेक उपलब्धियों को अर्जित कर रहा है। देश का यह पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जहां शोध की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने अपने स्रोत से पोस्ट डॉक्टोरल फेलोशिप की व्यवस्था की है।
सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री ने भेजा संदेश
विमोचन करते राज्यपाल
- फोटो : अमर उजाला
पूर्वांचल विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन की स्मारिका प्रकाशन हुई है। स्मारिका में देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल राम नाईक, उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, कुलपति प्रो. राजाराम यादव के संदेश प्रकाशित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा है कि समय के साथ बदलती चुनौतियों को देखते हुए विश्वविद्यालय की शिक्षण व्यवस्था में रचनात्मक बदलाव स्वभाविक है। विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सरकार प्रयासरत है। अगले पांच सालों में दस निजी और दस सरकारी विश्वविद्यालयों को दस हजार करोड़ रुपये का फंड दिया जाएगा।
सम्मेलन में कुलपति प्रो. राजाराम यादव के पिता दरबारी लाल यादव रचित काव्य संग्रह (आशु कवि दरबारी लाल यादव की रचनाएं) का विमोचन राज्यपाल राम नाईक ने किया। इसके संपादक प्रो. राजा राम यादव और डा. पुनीत धवन हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा है कि समय के साथ बदलती चुनौतियों को देखते हुए विश्वविद्यालय की शिक्षण व्यवस्था में रचनात्मक बदलाव स्वभाविक है। विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सरकार प्रयासरत है। अगले पांच सालों में दस निजी और दस सरकारी विश्वविद्यालयों को दस हजार करोड़ रुपये का फंड दिया जाएगा।
सम्मेलन में कुलपति प्रो. राजाराम यादव के पिता दरबारी लाल यादव रचित काव्य संग्रह (आशु कवि दरबारी लाल यादव की रचनाएं) का विमोचन राज्यपाल राम नाईक ने किया। इसके संपादक प्रो. राजा राम यादव और डा. पुनीत धवन हैं।