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‘चीनी तीतर’ से गुलजार हुआ सारनाथ पक्षी विहार
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Updated Sat, 04 Apr 2015 02:32 AM IST
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सारनाथ। सारनाथ पक्षी विहार में आधुनिक ढंग से बने घरौंदे में देसी-विदेशी पक्षी शोभा बढ़ा रहे हैं। वन विभाग ने कई प्रजातियों के पक्षियों को केज में रखा है। इसमें कोलकाता से मंगाया गया ‘गोल्डेन फिजेंट’ (चीनी तीतर) नर और मादा आकर्षण का केंद्र हैं। सुनहले-भूरे रंग के ये पक्षी सैलानियों को खूब आकर्षित कर रहे हैं।
सारनाथ पक्षी विहार को लाखों रुपये से संवारा गया है। घरौंदे में लाल मुनिया, लव बर्ड, बजरी, तोता, काकाटील पक्षी रखे गए हैं। लेकिन इसमें गोल्डेन फिजेंट सबसे अधिक आकर्षित कर रहा है। नर पक्षी की लंबाई लगभग एक मीटर है। रंग सुनहला, पीला, भूरा और नारंगी है। मादा की लंबाई इससे छोटी है। जो भूरे
और काले रंग की है। इनका जीवन चक्र पांच से छह साल का है। मादा पक्षी एक बार में आठ से दस अंडे देती है। दोनों की चोंच पीले रंग की है। प्रजनन काल के दौरान पर पक्षी चकचक की आवाज करता है। इसे कोलकाता से 20 हजार रुपये में मंगया गया है। रेंजर मदन लाल चौरसिया ने बताया कि ये पक्षी चीन के पर्वतों और वनों में पाए जाते हैं। पक्षी पर्यटकों के आकर्षण केंद्र बने हुए हैं।
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सारनाथ पक्षी विहार को लाखों रुपये से संवारा गया है। घरौंदे में लाल मुनिया, लव बर्ड, बजरी, तोता, काकाटील पक्षी रखे गए हैं। लेकिन इसमें गोल्डेन फिजेंट सबसे अधिक आकर्षित कर रहा है। नर पक्षी की लंबाई लगभग एक मीटर है। रंग सुनहला, पीला, भूरा और नारंगी है। मादा की लंबाई इससे छोटी है। जो भूरे
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और काले रंग की है। इनका जीवन चक्र पांच से छह साल का है। मादा पक्षी एक बार में आठ से दस अंडे देती है। दोनों की चोंच पीले रंग की है। प्रजनन काल के दौरान पर पक्षी चकचक की आवाज करता है। इसे कोलकाता से 20 हजार रुपये में मंगया गया है। रेंजर मदन लाल चौरसिया ने बताया कि ये पक्षी चीन के पर्वतों और वनों में पाए जाते हैं। पक्षी पर्यटकों के आकर्षण केंद्र बने हुए हैं।
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