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झिझक छोड़ें, परिस्थितियों का डटकर सामना करें

Mon, 28 Dec 2020 11:38 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 28 Dec 2020 11:38 PM IST
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Give up hesitating face the situation
राबर्ट्सगंज स्थित सीनियर सेक्रेंडी पब्लिक स्कूल में अमर उजाला अपराजिता गोष्ठी को संबोधित करती ? - फोटो : SONBHADRA
सोनभद्र। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। छात्राएं झिझक छोड़ें और जागरूक बनें। मुकाम पाने के लिए हर परिस्थिति का मजबूती से सामना करें। समाज सेविका ज्योति जैन ने छात्राओं और शिक्षिकाओं का आत्मविश्वास बढ़ाते हुए सोमवार को ये बातें कहीं। वह प्रकाश जीनियस इंटर कॉलेज, राबर्ट्सगंज में अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित सेल्फ कॉन्फिडेंस वर्कशाप को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। इस मौके पर अध्यापिकाओं और छात्राओं समेत 50 लोग मौजूद थे।
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शिक्षिका प्रीति मिश्रा ने कहा कि छात्राओं को किसी विपरीत परिस्थिति का डटकर मुकाबला करने के लिए तैयार रहना चाहिए। प्रशासन को चाहिए कि वह कालेज आने और जाने के समय स्कूलों के आसपास सुरक्षा के इंतजाम रखे, ताकि छात्राओं को किसी तरह की अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़े।
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कीर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि महिलाएं किसी भी पेशे में हों, उन्हें अपना अधिकार जानना चाहिए। अधिकार और जागरूकता ही ऐसे शस्त्र हैं, जिससे कोई भी महिला खुद को सशक्त बना सकती है।
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गीता मौर्या ने कहा कि लड़कियों के मन से डर और झिझक मिटाने के लिए विद्यालय और परिवार दोनों तरफ से प्रयास होने चाहिए। अनजाने डर और झिझक के कारण वे परिस्थितियों का सामना करने से घबराती हैं। अगर उन्हें जागरूक किया जाए तो वे किसी भी चुनौती से निबटने में सक्षम हो जाएं। संजू पांडेय ने कहा कि महिलाओं और छात्राओं को अधिकार, शक्ति का एहसास कराने की जरूरत है। महिलाएं किसी भी चुनौती से निबटने में सक्षम हैं। बस जरूरत हैं उन्हें सामाजिक सुरक्षा देने और जागरूक करने की। निर्मला ने कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय की व्यवस्था होनी चाहिए। इसको लेकर ठोस कदम उठाए जाने चाहिए । 21वीं सदी में भी महिलाओं की सुरक्षा बड़ी चुनौती है, क्योंकि तमाम पुरुषों की महिलाओं के प्रति सोच नहीं बदली है। वर्षा ने कहा कि लड़कियों का हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन यह साबित करता है कि वे कुछ भी करने में सक्षम हैं। बस जरूरत है उन्हें जरूरी समर्थन देने और अधिकारों के प्रति जागरूक करते रहने की। सुमन जायसवाल ने कहा कि बालिका शिक्षा पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। शिक्षा ही ऐसा माध्यम है, जिससे महिलाएं हर क्षेत्र में मजबूती से कदम बढ़ा सकती हैं। उन्होंने घर और कार्य स्थल दोनों स्थानों पर महिलाओं को सम्मान देने और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने पर बल दिया।
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