फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Ghoda Nala will be repaired with the help of robotic camera inspection by Chief Engineer from Lucknow

Varanasi News: रोबोटिक कैमरे की मदद से होगी घोड़ा नाला की मरम्मत, लखनऊ से आए मुख्य अभियंता का निरीक्षण

Thu, 19 Jun 2025 12:44 AM IST
नितीश कुमार पांडेय अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: नितीश कुमार पांडेय Updated Thu, 19 Jun 2025 12:44 AM IST
सार

शासन के निर्देश पर लखनऊ से आए मुख्य अभियंता ने देर रात किया निरीक्षण किया और ये नतीजा निकला कि रोबोटिक कैमरे की मदद से घोड़ा नाला की मरम्मत की जाएगी। बता दें कि रोपवे की पाइलिंग के दौरान गोदौलिया चौराहे पर शाही नाले के एक हिस्से की दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी। 
 

विज्ञापन
Ghoda Nala will be repaired with the help of robotic camera inspection by Chief Engineer from Lucknow
शाही नाला वाराणसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रोपवे की पाइलिंग के दौरान गोदाैलिया चौराहे पर शाही नाले के एक हिस्से घोड़ा नाला की 25 फीट दीवार क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसकी मरम्मत रोबोटिक कैमरे की मदद से की जाएगी। लखनऊ से जल निगम के मुख्य अभियंता संजय कुमार गौतम गोदौलिया पहुंचे।

विज्ञापन


उन्होंने निरीक्षण के दौरान विभागीय इंजीनियरों को रोबोटिक कैमरे की मदद से सुरक्षा पहलुओं को पूरी तरह से अध्ययन के बाद जल्द से जल्द काम शुरू कराने की हिदायत दी। उनके जाने के बाद वहां मरम्मत से जुड़े सामान पहुंचने लगे हैं।
विज्ञापन


विभागीय इंजीनियरों के अनुसार सुरक्षा के सभी उपाय किए जाएंगे। इसके बाद मरम्मत का काम शुरू होगा। नाले के अंदर कुछ भाग काफी खतरनाक हैं। इस नाते रोबोटिक कैमरों का सहारा लिया जाएगा। इससे अंदर की तस्वीर के आधार पर काम शुरू कराया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले दिनों दुर्गाघाट के शाही नाले की मरम्मत में खतरे को देखते हुए रोबोटिक कैमरे की मदद ली गई थी। बारिश के मौसम में नाले की मरम्मत किसी चुनौती से कम नहीं है। फिर भी काम को जल्द से जल्द पूरा कराया जाएगा।
काम को पूरा कराने में 30 से 40 दिन का समय लग सकता है। चूंकि पहले चरण में सीवर चैंबरों को खोजा जाएगा। इसके बाद सभी सीवर चैंबरों को खोला जाता है ताकि सीवर से बनने वाली गैस बाहर निकल जाए। इसके बाद उस स्थान को खोदा जाएगा जहां नाला क्षतिग्रस्त हुआ है। उसकी पूरी चहारदीवारी बनाई जाएगी। उसके फ्लो को किसी प्रकार से छेड़छाड़ नहीं किया जाएगा।


सिर्फ शाही नाले पर ही निर्भर है शहर की सीवर व्यवस्था

शहर की सीवर व्यवस्था सिर्फ शाही नाले पर ही निर्भर है। शाही नाला जिसे मुगलों ने सुरंग के रूप में विकसित किया था। बाद में ब्रिटिश हुकूमत ने उसे सीवर व्यवस्था में तब्दील कर दिया। नाले की उम्र 200 साल से भी ज्यादा हो गई। जगह-जगह तोड़फोड़ कर लोगों ने अपनी सीवर लाइन जुड़वा ली है। नतीजा यह नाला भी जीर्णशीर्ण हो गया है।




 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed