गाजीपुर। ‘प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना’ से जनपदवासियों को जमीन के विवादों से छुटकारा मिलेगा। इसके लिए ‘सर्वे आफ इंडिया’ गांवों का ड्रोन कैमरे की मदद से डिजटिल मानचित्र तैयार कर रहा है। मानचित्र से जिले के 1829 गांवों के लोगों को ग्रामीण आवासीय अधिकार अभिलेख (घरौनी) उपलब्ध कराई जाएगी। अब तक तीन तहसीलों के 121 गांवों का सर्वे पूरा हो गया है। इनमें से आठ गांवों के 444 परिवारों को घरौनी दी गई है। घरौनी से गांव में बने हर घर का अभिलेख ग्रामीण प्राप्त कर सकेंगे। अपर जिलाधिकारी राजस्व के अनुसार, ‘प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना’ के तहत सातों तहसीलों के सर्वे के लिए मात्र एक ड्रोन कैमरा मिला है। इनसे 2393 गांवों में सर्वे होगा। तहसीलवार गांवों का सर्वे शुरू हो गया है। ड्रोन के नक्शे में गांव के मकान नंबर के साथ खसरा नंबर और मालिक का नाम भी दर्ज होगा। इसके आधार पर ग्रामीणों की ‘घरौनी’ तैयार की जाएगी। अब तक गांवों में बने आवासों का कोई पुख्ता रिकार्ड नहीं था। राजस्व विभाग के पास खतौनी में कृषि भूमि का विवरण तो था, लेकिन गांवों में बने मकानों का नक्शा व मकान नंबर नहीं मौजूद था। लेकिन अब घरौनी में सब कुछ शामिल हो जाएगा। सबसे पहले सदर तहसील के आठ गांवों में अमटारी, चकबाकर,सलारपुर, बसका, क्यामपुर, चक मसकनी, नगवां बुजुर्ग का सर्वे हुआ। यहां के ग्रामीणों को घरौनी उपलब्ध करा दी गई है। वहीं, जमानिया तहसील के 86 और सेवराई के 27 गांवों का सर्वे पूरा हो चुका है। लेकिन अभी तक टीम ने गांवों का मानचित्र उपलब्ध नहीं कराया है। मुख्य राजस्व अधिकारी सुशील श्रीवास्तव ने बताया कि सर्वे आफ इंडिया की टीम ड्रोन कैमरे से गांवों का सर्वे कर उसे लखनऊ मुख्यालय भेजकर उसका डिजिटल मानचित्र-एक जारी करता है। इसके बाद प्रारूप पांच में पूरा विवरण जोड़ा जाता है। फिर गांव में खुली बैठक कर आपत्तियां मांगी जाती हैं। अंत में मानचित्र-दो जारी कर प्रारूप दस में शामिल कर पात्र व्यक्ति को घरौनी जारी की जाती है।