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गंगा आरती की अलौकिकता देख बोले वाल्टर... वाऊ वंडरफुल, घाटों की सजावट को अपलक रहे निहारा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 23 Mar 2018 02:06 PM IST
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गंगा आरती देखते हुए जर्मन राष्ट्राध्यक्ष
- फोटो : अमर उजाला
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काशी के अर्द्धचंद्राकार घाटों का अप्रतिम सौंदर्य और गंगा आरती का नजारा देखकर जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वाल्टर स्टेनमायर के मुंह से बरबस ही निकल पड़ा वाऊ वंडरफुल...। गंगा आरती की अलौकिकता और घाटों की भव्य सजावट व सुंदरता को जर्मन राष्ट्रपति अपलक निहारते रह गए।
बजड़े पर सवार राष्ट्रपति काशी में गंगा के घाटों को देखकर चकित रह गए। उत्सुकता ऐसी थी कि बजड़े पर खड़े भारतीयों से घाटों के बारे में जानकारी लेते रहे। गुरुवार को शाम 6:51 बजे जर्मन राष्ट्रपति का बजड़ा दशाश्वमेध घाट पर पहुंचा।
घाट की अप्रतिम सुंदरता देखकर राष्ट्रपति ने सराहना की। घाट पर मौजूद लोगों ने भारत और जर्मनी के झंडों को लहराकर उनका स्वागत किया। पूरा घाट गेंदा, गुलाब के फूल-मालाओं से सजा मह-मह कर रहा था।
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बजड़े पर सवार राष्ट्रपति काशी में गंगा के घाटों को देखकर चकित रह गए। उत्सुकता ऐसी थी कि बजड़े पर खड़े भारतीयों से घाटों के बारे में जानकारी लेते रहे। गुरुवार को शाम 6:51 बजे जर्मन राष्ट्रपति का बजड़ा दशाश्वमेध घाट पर पहुंचा।
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घाट की अप्रतिम सुंदरता देखकर राष्ट्रपति ने सराहना की। घाट पर मौजूद लोगों ने भारत और जर्मनी के झंडों को लहराकर उनका स्वागत किया। पूरा घाट गेंदा, गुलाब के फूल-मालाओं से सजा मह-मह कर रहा था।
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कन्याओं ने गंगा आरती को कराया पूर्ण
गंगा घाट पर बजड़े पर सवार फ्रैंक वाल्टर स्टेनमायर
- फोटो : अमर उजाला
घाट के प्रस्तर सोपानों पर टिमटिमाते दीपकों की छटा अतुलनीय थी। मानों स्वर्ग धरती पर उतर आया हो। घाट पर जैसे ही राष्ट्रपति वाल्टर पहुंचे वैदिक ब्राह्मणों ने पहले गंगा पूजन कराया।
उसके बाद वह उसी मणि पर बैठें जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ बैठ कर गंगा आरती का मनोरम दृश्य देखा था। फिर शुरू हुई गंगा आरती। नौ वैदिक ब्राह्मणों और 18 कन्याओं ने गंगा आरती को पूर्ण कराया।
आरती के ही दौरान राष्ट्रपति को विशेष तरीके से बना स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्रम, रुद्राक्ष और प्रसाद के साथ उपहार भेंट किया गया। मंच पर बैठने के बाद जर्मन राष्ट्रपति ने आरती के बारे में जानकारी ली। आरती की हर विधि के बारे में अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने पूरी जानकारी दी।
उसके बाद वह उसी मणि पर बैठें जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो साल पहले जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ बैठ कर गंगा आरती का मनोरम दृश्य देखा था। फिर शुरू हुई गंगा आरती। नौ वैदिक ब्राह्मणों और 18 कन्याओं ने गंगा आरती को पूर्ण कराया।
आरती के ही दौरान राष्ट्रपति को विशेष तरीके से बना स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्रम, रुद्राक्ष और प्रसाद के साथ उपहार भेंट किया गया। मंच पर बैठने के बाद जर्मन राष्ट्रपति ने आरती के बारे में जानकारी ली। आरती की हर विधि के बारे में अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने पूरी जानकारी दी।