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भारत में जर्मनी राजदूत को भाया बनारसी अंदाज, दशहरा उत्सव मनाने के लिए पहुंचे, तस्वीरों को किया ट्वीट
Thu, 14 Oct 2021 02:02 PM IST
उत्पल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: उत्पल कांत
Updated Thu, 14 Oct 2021 02:02 PM IST
सार
इन दिनों वाराणसी में दशहरा उत्सव का उल्लास है। इस उल्लास को करीब से देखने और जानने के लिए भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे लिंडनर वाराणसी पहुंचे है।
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साधु के साथ नाव पर भारत में जर्मनी के राजदूत
- फोटो : सोशल मीडिया।
विस्तार
सात वार और नौ त्योहार की मान्यता वाला पर्व-उत्सवों का रसिया शहर बनारस बरबस ही देशी-विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। इन दिनों शहर भर में दशहरा उत्सव का उल्लास है। इस उल्लास को और करीब से देखने और जानने के लिए भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे लिंडनर वाराणसी पहुंचे है।
बनारस आगमन के बाद उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट में तस्वीरों के जरिए जानकारी साझा की है। बृहस्पतिवार सुबह जर्मन राजदूत ने गंगा में नौकायन कर सुबह-ए-बनारस का आनंद लिया। नाव पर मौजूद साधू की तस्वीरों के साथ उन्होंने अपनी तस्वीरों को भी पोस्ट किया।
उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- वाराणसी (बनारस, काशी) को हिंदुओं द्वारा नदियों के सबसे पवित्र स्थान के रूप में माना जाता है। नदी के किनारे 90 घाट हैं। यहां गंगा के पानी से जीव शुद्ध होते हैं और मृत्यु को 'मोक्ष' मिलने के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही उन्होंने तस्वीरों का समय गुरुवार सुबह छह बजे का बताया।
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इससे पहले के ट्वीट में उन्होंने ये जानकारी साझा की थी कि वो इस बार दशहरा पर्व दिल्ली में नहीं बल्कि पृथ्वी पर सबसे प्राचीन शहर बनारस में मनाएंगे। वहीं 12 अक्तूबर को किए एक ट्वीट में वाल्टर जे लिंडनर ने पूछा था कि हिंदुओं के बड़े त्योहारों में से एक नवरात्र का अंतिम दिन दशहरा इस बार किस शहर में मनाया जाए। बता दें कि भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे लिंडनर संगीत और फोटोग्राफी में काफी ज्यादा रुचि है।
पढ़ें: काशी के घरों में कन्याओं संग पूजे जा रहे भैरव, मां सिद्धिदात्री के दरबार में उमड़ी भक्तों की भीड़
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बनारस आगमन के बाद उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट में तस्वीरों के जरिए जानकारी साझा की है। बृहस्पतिवार सुबह जर्मन राजदूत ने गंगा में नौकायन कर सुबह-ए-बनारस का आनंद लिया। नाव पर मौजूद साधू की तस्वीरों के साथ उन्होंने अपनी तस्वीरों को भी पोस्ट किया।
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उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- वाराणसी (बनारस, काशी) को हिंदुओं द्वारा नदियों के सबसे पवित्र स्थान के रूप में माना जाता है। नदी के किनारे 90 घाट हैं। यहां गंगा के पानी से जीव शुद्ध होते हैं और मृत्यु को 'मोक्ष' मिलने के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही उन्होंने तस्वीरों का समय गुरुवार सुबह छह बजे का बताया।
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इससे पहले के ट्वीट में उन्होंने ये जानकारी साझा की थी कि वो इस बार दशहरा पर्व दिल्ली में नहीं बल्कि पृथ्वी पर सबसे प्राचीन शहर बनारस में मनाएंगे। वहीं 12 अक्तूबर को किए एक ट्वीट में वाल्टर जे लिंडनर ने पूछा था कि हिंदुओं के बड़े त्योहारों में से एक नवरात्र का अंतिम दिन दशहरा इस बार किस शहर में मनाया जाए। बता दें कि भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे लिंडनर संगीत और फोटोग्राफी में काफी ज्यादा रुचि है।
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