नए साल में संतों का होगा जुटान, ज्ञानवापी परिसर से लेकर भारत-नेपाल समेत कई मुद्दों पर होगा मंथन
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भारत और नेपाल के खराब रिश्तों की डोर अब संतों ने जोड़ने का जिम्मा उठाया है। श्री काशी विश्वनाथ से पशुपतिनाथ और बागमती से गंगा के किनारे फिर से जुड़ेंगे। अखिल भारतीय संत समिति ने इसका बीड़ा उठाया है। जनवरी माह में काशी में होने वाले भारत और नेपाल के संतों के समागम में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा।
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि संत समिति की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में देश के कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। सबसे प्रमुख मुद्दा भारत और नेपाल के खराब संबंधों को फिर से संजीवनी देना है।
इसके अलावा श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के धन एवं जन संकलन में सहयोग, वनवासी क्षेत्रों में संतों की कथा, नेपाल के सामाजिक, धार्मिक, कूटनीति, काशी-काठमांडू और अवध जनकपुरी में संत बैठक पर विमर्श करेंगे। इसके अलावा हिंदू पहचान संरक्षण बिल, मंदिर प्रबंधन, सात्विक प्रमाणन परिषद, काशी विश्वनाथ, पुजारी प्रशिक्षण केंद्र और अल्पसंख्यक की परिभाषा पर भी संत बैठक करेंगे।
दो से तीन जनवरी 2021 तक होने वाली बैठक में देश भर के संतों का जमावड़ा होगा। अखिल भारतीय संत समिति ने देश भर के संतों को निमंत्रण पत्र भेज दिया है। संयोजन की जिम्मेदारी पातालपुरी मठ के महंत बालक दास को दी गई है। श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय के प्रांगण में दो से तीन जनवरी तक संत सम्मेलन आयोजित होगा।
ये संत होंगे शामिल
महंत ज्ञानदेव सिंह, शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभाष्कर, स्वामी परमानंद गिरि महाराज,महंत नृत्यगोपाल दास, महंत फूलडोल बिहारी दास समेत देश भर के सभी प्रमुख संत, महंत, महामंडलेश्वर को आमंत्रण पत्र भेजा गया है।