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गाजीपुर: झोपड़ी में तेज धमाके के साथ फटा गैस सिलेंडर, बाल-बाल बचे पति-पत्नी
Thu, 17 Jan 2019 05:47 PM IST
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न्यूज डेस्क,अमर उजाला,गाजीपुर
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Published by: utpal utpal
Updated Thu, 17 Jan 2019 05:47 PM IST
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दो झोपड़ियां जलकर राख, हजारों का सामान चढ़ा आग की भेंट
- फोटो : अमर उजाला
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गाजीपुर जिले के तेतारपुर में खेत में स्थित झोपड़ी में रसोई गैस में रिसाव होने से गुरुवार की सुबह आग लग गई। आग लगते ही पति-पत्नी जान बचाकर बाहर भागे। कुछ ही देर में धमाके के साथ सिलेंडर फट गया। काफी प्रयास के बाद लोगों ने आग पर काबू पाया। आग की इस घटना में जहां दो झोपड़ियां कुछ ही देर में राख में तब्दील हो गई। वहीं हजारों का गृहस्थी का सामान आग की भेंट चढ़ गया।
गांव निवासी त्रिभुवन सिंह गांव में बने पक्के मकान में न रह कर खेत में दो झोपड़ी डालकर पत्नी के साथ रहते थे। गुरुवार की सुबह पत्नी निशा ने चूल्हा पर चाय बनाई। सिलेंडर का रेग्युलेटर बंद करना भूल गई। गैस कहीं से लीक हो रही थी। दिन में करीब दस बजे खाना बनाने के लिए पत्नी सब्जी काट कर रही थी। उन्होंने पति त्रिभुवन से चूल्हा जलाने को कहा।
इस पर जैसे ही उन्होंने माचिस की तीली जलाई, आग लग गई। आग लगते ही आनन-फानन में पति-पत्नी जान बचाकर झोपड़ी से बाहर भागे। कुछ ही देर में झोपड़ी से आग की तेज लपटें उठने लगी। इसी बीच तेज आवाज के साथ सिलेंडर फट गया। धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके की तरफ दौड़ पड़े।
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लोगों ने पति-पत्नी को झोपड़ी से बाहर देखा तो राहत की सांस ली। शोर-शराबा के बीच काफी प्रयास के बाद लोगों ने आग पर काबू पाया। तब तक दो झोपड़ियों के राख में तब्दील होने के साथ ही उसमें रखा गृहस्थी का हजारों का सामान आग की भेंट चढ़ गया। घटना को लेकर ग्रामीणों में यह चर्चा होती रही कि गनीमत थी कि पति-पत्नी झोपड़ी से बाहर निकल गए थे, अन्यथा बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।
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गांव निवासी त्रिभुवन सिंह गांव में बने पक्के मकान में न रह कर खेत में दो झोपड़ी डालकर पत्नी के साथ रहते थे। गुरुवार की सुबह पत्नी निशा ने चूल्हा पर चाय बनाई। सिलेंडर का रेग्युलेटर बंद करना भूल गई। गैस कहीं से लीक हो रही थी। दिन में करीब दस बजे खाना बनाने के लिए पत्नी सब्जी काट कर रही थी। उन्होंने पति त्रिभुवन से चूल्हा जलाने को कहा।
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इस पर जैसे ही उन्होंने माचिस की तीली जलाई, आग लग गई। आग लगते ही आनन-फानन में पति-पत्नी जान बचाकर झोपड़ी से बाहर भागे। कुछ ही देर में झोपड़ी से आग की तेज लपटें उठने लगी। इसी बीच तेज आवाज के साथ सिलेंडर फट गया। धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण मौके की तरफ दौड़ पड़े।
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लोगों ने पति-पत्नी को झोपड़ी से बाहर देखा तो राहत की सांस ली। शोर-शराबा के बीच काफी प्रयास के बाद लोगों ने आग पर काबू पाया। तब तक दो झोपड़ियों के राख में तब्दील होने के साथ ही उसमें रखा गृहस्थी का हजारों का सामान आग की भेंट चढ़ गया। घटना को लेकर ग्रामीणों में यह चर्चा होती रही कि गनीमत थी कि पति-पत्नी झोपड़ी से बाहर निकल गए थे, अन्यथा बड़ी दुर्घटना हो सकती थी।