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पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने की गणगौर पूजा

Fri, 16 Apr 2021 01:52 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 16 Apr 2021 01:52 AM IST
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gangaur vrat in varanasi
पति की लंबी उम्र के लिए चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया बृहस्पतिवार को महिलाओं ने गणगौर का पर्व मनाया। दिनभर निर्जला व्रत रखकर दोपहर में मां गणगौर व ईशरजी की पूजा-अर्चना की और गणगौर माता की कथा सुनी। वहीं कुंवारी कन्याओं ने इच्छित वर की प्राप्ति के लिए भी गणगौर का व्रत रखा।
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कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के कारण राजस्थानी समाज का पर्व गणगौर का समापन घरों में ही हुआ। शोभायात्रा और मूर्ति स्थापना व विसर्जन के सभी आयोजनों को समाज ने रद्द कर दिया। बृहस्पतिवार को गणगौर का विसर्जन नदी, तालाब की जगह घर की बाल्टी में करके परंपरा का निर्वहन किया गया। इस दौरान मां पार्वती की अवतार गणगौर माता और भगवान शिव के अवतार ईशरजी की आराधना हुई।
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चैत्र नवरात्र की तृतीया को काशी में गणगौर का महोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। बुलानाला स्थित सुड़िया से अपराह्न में गणगौर की दिव्य झांकी के साथ नगर की राजस्थानी समाज की महिलाएं गाजे-बाजे के साथ इस भव्य जुलूस में शामिल होती थीं। दशाश्वमेध घाट पर मां गंगा के मध्य में गणगौर का विधिवत विसर्जन हुआ करता था। लेकिन आज गणगौर सुड़िया में ही रहीं। पिछले साल लॉकडाउन के कारण भी गणगौर का समापन घरों में ही किया गया था।
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गणगौर माता से मांगी सुख समृद्धि और पति की दीर्घायु
राजस्थान व हरियाणा समाज की कुंवारी कन्या और विवाहित महिलाओं ने सज-धजकर घरों में ही गणगौर माता व ईशर, कानीराम, रोवा, मालिन की प्रतिमाओं का पूजन किया। दूर्वा से पानी का छींटा देकर गीत भी गुनगुनाया। हलुआ पूड़ी का भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया। गणगौर माता से सुख समृद्धि, पति की दीर्घायु एवं कुंवारी कन्याओं ने योग्य पति की कामना की।

होलिका भस्म से बनाती हैं प्रतिमाएं
होली के साथ ही माता गणगौर का पर्व आरंभ हो जाता है। महिलाएं होलिका की भस्म, गंगा व तालाब की मिट्टी से गणगौर, कानीराम, रोवा, ईशर, मालीन की मूर्तियां बनाती हैं। उन्हें नए वस्त्र धारण कराकर आभूषणों से अलंकृत कर घर में स्थापित करती हैं। 16 दिन पूजा के साथ ही उनकी भव्य झांकी सजाई जाती है। 17वें दिन घर में गणगौर की पूजन कर आसपास के कुआं या तालाब में विदाई दी जाती है।
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