फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   ganga

घुलनशील आक्सीजन की मात्रा ने बदला गंगा का रंग रूप

Sun, 24 May 2020 12:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 24 May 2020 12:27 AM IST
विज्ञापन
ganga
वाराणसी। लॉकडाउन से इंसान भले ही परेशान हों, लेकिन प्रकृति ने खुद को बेहतर बनाया है। हवा से लेकर पानी तक हर जगह लॉकडाउन का सकारात्मक असर नजर आ रहा है। बीते दो माह में गंगाजल की गुणवत्ता में 25 से 30 फीसदी तक सुधार हुआ है। जलीय जीवों के लिए यह सकारात्मक है। गंगाजल का रंग देखकर भी इसे महसूस किया जा सकता है।
विज्ञापन

बीएचयू के नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी का कहना है कि गंगाजल अभी केवल 25 से 30 फीसदी गंगा साफ हुआ है। वैज्ञानिकों की जांच में भी बात सामने आई है कि घुलनशील आक्सीजन की मात्रा बढ़ी है और बीओडी की मात्रा में कमी आई है। घुलनशील आक्सीजन की मात्रा का बढ़ना और बीओडी कम होना सकारात्मक है। इससे जलीय जीवों को बेहतर वातावरण मिलेगा। जहां-जहां गंगा में नाले गिरते हैं, उन्हें छोड़कर बाकी जगह गंगा 30 प्रतिशत से ज्यादा स्वच्छ हुई हैं। 35 से ज्यादा नालों से हर दिन 350 मिलियन लीटर सीवेज गंगा में जाता है। जिस जगह नाले गिरते वहां स्थिति अभी खराब है।
विज्ञापन

क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी कालिका सिंह का कहना है कि गंगा जल में काफी सुधार आया है। प्रदूषण का स्तर भी कम हुआ है। कई जगह से लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हो चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

बीएचयू के महामना मालवीय गंगा शोध केंद्र की रिपोर्ट
घाट 24 मार्च 20 अप्रैल
डीओ बीओडी डीओ बीओडी
शूलटंकेश्वर 8.2 2.8 9.5 1.2
सामनेघाट 7.6 3.2 8.7 1.5
अस्सी घाट 7.4 6.5 8.5 2.5
दशाश्वमेध घाट 7.2 4.6 8.5 1.4
राजघाट 4.5 9.5 7.2 7.5
ऐसे साफ रहती है नदी
- डीओ यानी डिजाल्व आक्सीजन की मात्रा नदी के पानी में 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से ज्यादा होनी चाहिए।
- बीओडी यानी बायोकेमिकल आक्सीजन डिजाल्व की मात्रा नदी के पानी में 3 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होनी चाहिए।
- फीकल कॉलीफार्म प्रति सौ मिलीलीटर पांच सौ से कम और पेयजल में यह मात्रा शून्य होनी चाहिए।
गंगाजल बैक्टीरिया को मारता है, वायरस को नहीं
प्रो. बीडी त्रिपाठी के अनुसार, गंगाजल बैक्टीरियोफाज है। यानी यह बैक्टीरिया को मारता है न कि किसी वायरस को। अब तक वायरस पर गंगा के पानी के प्रभाव संबंधी कोई शोध सामने नहीं आया है। कोविड-19 को मारने के लिए गंगाजल के क्लिनिकल ट्रायल को आईसीएमआर ने भी अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे पास ऐसा कोई डाटा नहीं है, जिसमें किसी वायरस पर गंगाजल का क्लिनिकल ट्रायल किया गया हो।
दोगुना हुआ फीकल कॉलीफार्म का प्रवाह
वाराणसी। गंगा में घुलनशील आक्सीजन की मात्रा बढ़ी है, लेकिन फीकल कॉलीफार्म दोगुना हो गया है। संकट मोचन फाउंडेशन की स्वच्छ गंगा रिसर्च लेबोरेटरी ने छह मार्च और चार अप्रैल को गंगाजल के सैंपल लिए थे। इसमें खिड़किया घाट पर फीकल कॉलीफार्म की मात्रा पांच करोड़ 20 लाख, नगवां में 3 करोड़ 70 लाख और वरुणा प्रवाह में यह छह करोड़ 40 लाख था। वहीं, चार अप्रैल को लिए गए सैंपल में नगवां पर सुबह के समय पांच करोड़ 70 लाख, शाम को तीन करोड़ 20 लाख, तुलसी घाट पर सुबह दो लाख दो हजार और शाम को एक लाख 24 हजार था।

बीएचयू आईआईटी के प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र का कहना है कि गंगा के स्वच्छ होने की बात तो सभी कर रहे हैं, लेकिन फीकल कॉलीफार्म पर कोई बात नहीं कर रहा है। फीकल कॉलीफार्म का मतलब है सीवेज। मानकों की बात करें तो नहाने के पानी में प्रति सौ मिली फीकल कॉलीफार्म की संख्या पांच सौ से कम होनी चाहिए। जबकि पीने के पानी में यह शून्य होना चाहिए।
गंगाजल में फीकल कॉलीफार्म की मात्रा
छह मार्च चार अप्रैल
तुलसीघाट 52000 202000
नगवा घाट 37000000 57000000
(आंकड़े प्रति सौ मिलीलीटर के हिसाब से)
घाटों पर बीओडी और डीओ
6 मार्च 4 अप्रैल
तुलसी घाट पर बीओडी 6.2 78
तुलसी घाट पर डीओ 6.8 7.0
नगवा घाट पर बीओडी 42 22
नगवा घाट पर डीओ 3.6 6.0
(आंकड़े मिलीग्राम प्रति लीटर में)
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed