काशी में बढ़ने लगी गंगा: आरपी व मान सिंह घाट से संपर्क टूटा, मणिकर्णिका का एक प्लेटफॉर्म जलमग्न; चौकियां डूबीं
वाराणसी में गंगा का पानी बढ़ने लगा है। इस कारण कुछ घाटों का संपर्क टूट गया है। इसे लेकर केंद्रीय जल आयोग और एनडीआरएफ की टीम ने अलर्ट जारी कर दिया है। घाट किनारे लोगों को एहतियात बरतने की अपील की जा रही है।
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Varanasi News: बनारस में गंगा बीते तीन दिनों में करीब 11 फीट तक घाटों पर चढ़ गईं हैं। राजेंद्र प्रसाद घाट और मान सिंह घाट से संपर्क टूट चुका है। महाश्मशान मणिकर्णिका घाट का एक प्लेटफॉर्म गंगा में जलमग्न हो चुका है। घाट पर 40 के बजाय सिर्फ 20 शव ही जलाए जा रहे हैं। बाकी शवों का छत पर अंतिम संस्कार हो रहा है।
हरिश्चंद्र घाट के सामने जमी मिट्टी कट चुकी है। अस्सी से लेकर राजघाट तक 100 से ज्यादा मठ-मंदिरों में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। पंडा-पुरोहितों की 300 से ज्यादा चौकियां डूब गईं हैं। टीका-त्रिपुंड लगाने वाले भी अब ऊंचाईयों पर पलायन कर रहे हैं। सिंधिया घाट के विश्व प्रसिद्ध झुके हुए रत्नेश्वर महादेव मंदिर का आधा भाग यानी कि शिखर तक पानी चढ़ गया है।
अस्सी घाट और दशाश्वमेध घाट के आरती के लिए बने प्लेटफॉर्म तक गंगा का पानी आ चुका है। आरती स्थल के पास से सारे सामान और चौकियां पीछे कर ली गईं हैं। घाटों के कई शिवलिंग और देवी-देवता भी जलमग्न हो गए हैं।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा का जलस्तर तीन दिनों में 3.33 मीटर तक ऊपर आ गया है। बुधवार को करीब 50 सेंटीमीटर तक गंगा का जलस्तर बढ़ा। बुधवार रात से बहाव कम हुआ, लेकिन 10 मिलीमीटर प्रति घंटे की दर से गंगा का जलस्तर बढ़ता रहा।
इन घाटों का टूट सकता है संपर्क
मर्णिकर्णिका घाट और विश्वनाथ मंदिर गंगा द्वार की ओर से आवागमन भी बंद होने की स्थिति में आ चुका है। वहीं घाटों पर कीचड़ और गंदगी पसर गई है। पानी बढ़ा तो अस्सी-तुलसी, मणिकर्णिका-गंगा द्वार, तुलसी-भदैनी समेत कई घाटों पर आवागमन बाधित हो सकता है। मणिकर्णिका घाट के राहुल पंडित ने बताया कि यदि छह फीट पानी और चढ़ा तो मणिकर्णिका घाट के बचे दोनों प्लेटफॉर्म भी डूब जाएंगे।
पहाड़ों पर हुई बारिश का पानी पहुंच रहा बनारस
काशी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है और अब इसका असर घाटों पर साफ दिखाई देने लगा है। बुधवार तक गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर से लगभग 8 मीटर नीचे है। पहाड़ी इलाकों और पश्चिमी यूपी में हो रही भारी बारिश के चलते गंगा का पानी तेजी से बनारस में आ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी स्थिति अगस्त महीने में देखी जाती है।