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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ganga pollution increases in Varanasi Pollution Control Board released report

आचमन तो छोड़िए नहाने लायक भी नहीं है बनारस में गंगाजल, डी श्रेणी की गुणवत्ता 

Sat, 05 Dec 2020 01:00 AM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: विचित्र सिंह Updated Sat, 05 Dec 2020 01:00 AM IST
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Ganga pollution increases in Varanasi Pollution Control Board released report
नगवा नाले का गंदा पानी अब भी गंगा में बहता हुआ - फोटो : अमर उजाला।

काशी में गंगाजल की गुणवत्ता खराब हुई है। शासन की ओर से जारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा में पिछले दो सालों में प्रदूषण की मात्रा बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, बनारस में गंगाजल को डी श्रेणी में रखा गया है और इसके अनुसार पानी आचमन तो दूर नहाने के लायक भी नहीं है। एनजीटी ने गंगाजल की खराब हालत पर चिंता जताते हुए स्थानीय स्तर पर चल रहे गंगा निर्मलीकरण के कार्यों पर भी सवालिया निशान उठाए हैं। 

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से गंगा की रिपोर्ट में प्रदूषण बढ़ने का मामला सामने आया है। शासन ने विभाग की रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए तत्काल सुधार के लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं। अक्तूबर 2018 से अक्तूबर 2020 तक की गई जांच रिपोर्ट के अनुसार 30 मॉनिटरिंग स्थलों में से 28 जगहों पर गंगाजल की गुणवत्ता खराब मिली है।

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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गंगा के प्रदूषण पर नजर रखने के लिए बिजनौर से गाजीपुर तक 30 मॉनिटरिंग स्थल स्थापित किए गए हैं। अक्तूबर की रिपोर्ट के अनुसार मिर्जापुर, वाराणसी सहित 15 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर प्रदूषण के हालात अधिक खराब यानि डी श्रेणी में मिले हैं। अक्तूबर 2018 व अक्तूबर 2020 के जल गुणवत्ता आंकड़ों के तुलनात्मक विश्लेषण में 50 फीसदी मॉनिटरिंग स्थलों पर प्रदूषण काफी अधिक मिला है।  प्रदेश के मुख्य सचिव आरके तिवारी ने बृहस्पतिवार को हुई बैठक में जिले में गंगा में प्रदूषण की स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की क्षेत्रीय इकाइयों को व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया है।

Ganga pollution increases in Varanasi Pollution Control Board released report
वाराणसी में शुक्रवार को शीतला घाट पर फैली गंदगी। - फोटो : अमर उजाला।

नहीं बंद हो सके हैं नाले

विश्वसुंदरी पुल से राजघाट के बीच गंगा में सीधे सीवेज और नालों का गिरना बंद नहीं हुआ है। अस्सी और वरुणा के संगम के अलावा रामनगर की ओर से भी गंगा में सीधे सीवेज का पानी मिल रहा है। शासन की ओर से वहीं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से शोधन किए बिना पानी गंगा में गिराया जा रहा है। दीनापुर एसटीपी से बिना शोधन किए पानी गंगा में बहाने पर जुर्माने की कार्रवाई की गई थी।

33 फीसदी सीवेज सीधे गिर रहा गंगा में

शहर का लगभग 33 प्रतिशत गंदा पानी सीधे गंगा में प्रवाहित हो रहा है। इसमें मल-कीचड़ भी शामिल है। गंगा प्रदूषण की सबसे बड़ी वजह असि नदी है। यहां से प्रतिदिन गंगा नदी में 50 एमएलडी से अधिक सीवर गिरता है। शहर का लगभग एक चौथाई सीवर का पानी विभिन्न नालों से होते हुए असि में मिलता है। वहीं आदिकेशव घाट पर वरुणा से भी सीवेज गंगा में मिल रहा है। 

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