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गंगा महोत्सव का आगाज आज, गंगा तट पर सुर,लय, ताल की बहेगी धारा
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Tue, 31 Oct 2017 04:21 PM IST
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गंगा के सुरम्य तट पर आज से आयोजन
- फोटो : facebook
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गंगा के सुरम्य तट पर आज की शाम गंगा महोत्सव के मुख्य आयोजन का आगाज गायन, वादन और नृत्य की मोहक प्रस्तुतियों से होगा। शहनाई की मंगलध्वनि के साथ ही सुर, लय, ताल की धारा बह निकलेगी। पहली निशा में जाने माने वीणा वादक पं. विश्व मोहन भट्ट मोहन वीणा के तार झंकृत होंगे तो डॉ. वैंकटेश कुमार का ख्याल गायन यादगार बनेगा।
राजेंद्र गंगानी कथक नृत्य की भावपूर्ण थिरकन से संगीत निशा में चार चांद लगाएंगे। चार दिवसीय महोत्सव में जाने माने कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। एक नवंबर की शाम महोत्सव की दूसरी निशा की शुरुआत अश्विनी भिड़े देशपांडे के गायन से होगी। वह ख्याल के अलावा ठुमरी, दादरा की भी बंदिशें पेश करेंगी।
पं. रोनू मजूमदार की बांसुरी और पं. देबज्योति बोस के सरोद की जुगलबंदी होगी। तबले पर संगत करेंगे पं. कुमार बोस। इनके बाद अंत में गीता चंद्रन भरत नाट्यम की थिरकन से मन मोहेंगी। दो नवंबर की शाम तीसरी निशा लोक और शास्त्रीय नृत्य के नाम समर्पित होगी।
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इसमें अनु सिन्हा का कथक नृत्य होगा। इनके बाद तेरह ताली, भवई नृत्य अवं मांगड़यार गायन गंगा देवी समूह की ओर से किया जाएगा। तीन नवंबर को आखिरी निशा में संजीव अभयंकर का गायन होगा।
इनके बाद पं. भजन सोपोरी और अभय रुस्तम सोपोरी संतूर वादन पेश करेंगे। विशाल कृष्ण के कथक नृत्य से महोत्सव की संगीत निशा विराम लेगी।
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राजेंद्र गंगानी कथक नृत्य की भावपूर्ण थिरकन से संगीत निशा में चार चांद लगाएंगे। चार दिवसीय महोत्सव में जाने माने कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी। एक नवंबर की शाम महोत्सव की दूसरी निशा की शुरुआत अश्विनी भिड़े देशपांडे के गायन से होगी। वह ख्याल के अलावा ठुमरी, दादरा की भी बंदिशें पेश करेंगी।
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पं. रोनू मजूमदार की बांसुरी और पं. देबज्योति बोस के सरोद की जुगलबंदी होगी। तबले पर संगत करेंगे पं. कुमार बोस। इनके बाद अंत में गीता चंद्रन भरत नाट्यम की थिरकन से मन मोहेंगी। दो नवंबर की शाम तीसरी निशा लोक और शास्त्रीय नृत्य के नाम समर्पित होगी।
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इसमें अनु सिन्हा का कथक नृत्य होगा। इनके बाद तेरह ताली, भवई नृत्य अवं मांगड़यार गायन गंगा देवी समूह की ओर से किया जाएगा। तीन नवंबर को आखिरी निशा में संजीव अभयंकर का गायन होगा।
इनके बाद पं. भजन सोपोरी और अभय रुस्तम सोपोरी संतूर वादन पेश करेंगे। विशाल कृष्ण के कथक नृत्य से महोत्सव की संगीत निशा विराम लेगी।
गंगा महोत्सव में तीन मजिस्ट्रेट करेंगे निगरानी
गंगा महोत्सव
- फोटो : self
वाराणसी प्रशासन ने 31 अक्तूबर से तीन नवंबर तक चलने वाले गंगा महोत्सव के लिए तीन मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाई है। ज्ञानवापी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार सिंह की ड्यूटी राजेंद्र प्रसाद घाट एवं आसपास के क्षेत्र, ज्ञानवापी मजिस्ट्रेट रामशकल की ड्यूटी कार्यक्रम स्थल पर और क्षेत्रीय मद्यनिषेध अधिकारी रामसेवक सिंह की ड्यूटी पार्किंग स्थल पर लगाई गई है। वहीं चार नवंबर को आयोजित देव दीपावली पर 13 मजिस्ट्रेट की ड्यूटी लगाई गई है।
नहीं होगी धन की कमी
गंगा महोत्सव में धन की कमी को दूर करने के लिए एक कोष तैयार किया गया है। इसके तहत सभी शिक्षाधिकारी इसमें पांच हजार रुपये जीवनपर्यंत योगदान करेंगे। इसका निर्णय महोत्सव के प्रथम दिन मिर्जापुर मंडल, देवीपाटन, फैजाबाद और बनारस के संयुक्त शिक्षा निदेशकों की उपस्थिति में लिया गया।
नहीं होगी धन की कमी
गंगा महोत्सव में धन की कमी को दूर करने के लिए एक कोष तैयार किया गया है। इसके तहत सभी शिक्षाधिकारी इसमें पांच हजार रुपये जीवनपर्यंत योगदान करेंगे। इसका निर्णय महोत्सव के प्रथम दिन मिर्जापुर मंडल, देवीपाटन, फैजाबाद और बनारस के संयुक्त शिक्षा निदेशकों की उपस्थिति में लिया गया।