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काशी में गंगा महोत्सव का आगाज: गंगा किनारे 'तेरी दीवानी..और बम बम लहरी' पर झूमे लोग

Fri, 24 Nov 2023 03:01 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: किरन रौतेला Updated Fri, 24 Nov 2023 03:01 PM IST
सार

पहली निशा की शुरुआत सुनील प्रसन्ना के शहनाई वादन से हुई। उन्होंने शहनाई पर राग पुरिया और धनाश्री में बंदिशें बजाकर कर्णप्रिय स्वरों से आनंद की अनुभूति कराई। दादरा की धुन से समापन किया। तबले पर अतुल श्रीवास्तव, दुक्कड़ पर राजेंद्र कुमार, शहनाई पर प्रवीण व प्रशांत और हारमोनियम पर गौरव ने संगत की। दूसरी प्रस्तुति मुंबई के समीत त्यागी व सुमानो त्यागी की रही।

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Ganga Festival kicks off in Varanasi: Dhrupad, Sufi on the banks of the Ganga and film music converged
गंगा महोत्सव - फोटो : संवाद

विस्तार

उत्तरवाहिनी गंगा तट पर गंगा महोत्सव में बृहस्पतिवार को ध्रुपद, सूफी और फिल्मी गीतों का संगम हुआ। श्रोता देर रात तक इसमें गोते लगाते रहे। इस महोत्सव के मंच से पहली बार ध्रुपद की आभा निखरी। राजघाट पर पांच दिवसीय गंगा महोत्सव का आगाज राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल के गंगा पूजन व दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इसके बाद गंगा के समानांतर संगीत प्रवाहित हुआ।

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पहली निशा की शुरुआत सुनील प्रसन्ना के शहनाई वादन से हुई। उन्होंने शहनाई पर राग पुरिया और धनाश्री में बंदिशें बजाकर कर्णप्रिय स्वरों से आनंद की अनुभूति कराई। दादरा की धुन से समापन किया। तबले पर अतुल श्रीवास्तव, दुक्कड़ पर राजेंद्र कुमार, शहनाई पर प्रवीण व प्रशांत और हारमोनियम पर गौरव ने संगत की। दूसरी प्रस्तुति मुंबई के समीत त्यागी व सुमानो त्यागी की रही। उन्होंने गुरु वंदना से गायन को विस्तार दिया। अंत में भजन से विराम दिया। इस महोत्सव में नवाचार के तहत पहली बार ध्रुपद गायकी को भी स्थान मिला। आशीष कुमार ने अलापचारी के बाद जोड़, झाला में बंदिशें पेश कीं। इनके बाद पं. तारकनाथ मिश्र ने सितार को विशिष्टता प्रदान करते हुए संगीत रसिकों को सितार की झंकार से झंकृत किया। उन्होंने राग शिव रंजनी छेड़ा तो घाट की सीढ़ियों पर बैठे संगीत प्रेमी खुद को झूमने से रोक नहीं पाए।

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इसके बाद शिवांग बाल्हकेश्वर के भजनों से लोग मुग्ध हुए। पहली निशा की अंतिम प्रस्तुति बनारस के सूफी गायक सुजीत कुमार तिवारी की रही। उन्होंने राम धुन के बाद सबेला का राग छेड़ा तो लोग ताल मिलाते नजर आए। तेरी दीवानी..., बम बम लहरी... आदि गीतों से समा बांधा। संचालन सौरभ चक्रवर्ती ने किया। एसीपी कोतवाली अमित पांडेय व पर्यटन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। उधर, महोत्सव के तहत काशी सांसद सांस्कृतिक महोत्सव के विजेता प्रतिभागियों की प्रस्तुति डॉ. राजेंद्र प्रसाद घाट पर हुई।

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काशीवासियों के डीएनए में संगीत: रवींद्र जायसवाल

मंत्री रवींद्र जायसवाल ने कहा कि संगीत काशीवासियों के डीएनए में है। उनके मन-मस्तिष्क में संगीत बसता है। संगीत की चारों विद्याएं काशी की ही देन है। संगीत ऐसी विधा है, जिससे भटका हुआ मन भी मुख्यधारा में आ जाता है।

 

गंगा महोत्सव में आज

डॉ. अर्चना आदित्य म्हस्कर का गायन, मालिनी अवस्थी का लोक गायन, आशुतोष श्रीवास्तव का भजन गायन, दीपक सिंह का लोक गायन, पं. अंशुमन महाराज का सरोद वादन, दिव्या व राहुल का ओडिसी व भरतनाट्यम नृत्य, पद्मजा रेड्डी के कुचिपुडी नृत्य की प्रस्तुति होगी।

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