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Varanasi News: कोई 3 तो कोई 4 पीढ़ियों से कर रहा है दशाश्वमेध तीर्थ पर स्नान, पढ़ें- कितनी प्राचीन है मान्यता

Sat, 08 Jun 2024 08:37 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sat, 08 Jun 2024 08:37 PM IST
सार

Varanasi News: तीर्थ पुरोहितों के साथ ही स्थानीय लोगों ने काशी की परंपरा काे निभाया और नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ा। दशाश्वमेध तीर्थ का स्नान ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा तक चलेगा और मान्यता है कि हर तिथि का स्नान उतने जन्मों के पाप का शमन करता है।

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ganga dussehra bathing at Dashashwamedh Tirth for three and four generations in varanasi
मनोज शर्मा, कन्हैयालाल त्रिपाठी, अजय शर्मा और कन्हैया दूबे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ज्येष्ठ मास के महीने में दशाश्वमेध तीर्थ स्नान की परंपरा शुक्रवार से शुरू हो गई। श्रद्धालुओं ने दशाश्वमेध तीर्थ पर स्नान किया और उसके बाद दशहरेश्वर महादेव के दर्शन किए। भोर में स्नान के साथ ही किसी ने तीन पीढि़यों से तो किसी ने चार पीढि़यों से दशाश्वमेध तीर्थ पर प्रतिपदा से पूर्णिमा तक स्नान की परंपरा का निर्वहन किया।

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जन्म जन्मांतर के पापों को दूर करने के लिए काशीवासियों ने ज्येष्ठ शुक्ल मास में दशाश्वमेध तीर्थ पर सुरसरि में पुण्य की डुबकी लगाई। शुक्रवार को भोर से ही श्रद्धालुओं ने दशाश्वमेध तीर्थ पर स्नान करना शुरू कर दिया।

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दादा के साथ पहली बार किया था दशाश्वमेध तीर्थ पर स्नान

काशी के सब तीर्थों में दशाश्वमेध तीर्थ की महिमा अलग है। मैंने पहली बार अपने दादा जगतदेव शर्मा के साथ पहली बार यहां स्नान किया। दादा बताते थे कि ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा, जेठ सुदी द्वितीया और गंगा दशहरा व मास की दशमी तिथि पर इस दशाश्वमेधतीर्थ में स्नान करने से जन्मों के पाप तुरंत नष्ट हो जाते हैं। हम बचपन से अपने दादा के साथ इन तिथियों पर स्नान, दान और दर्शन दशाश्वमेध तीर्थ पर अवश्य करते हैं। - मनोज शर्मा, तीर्थ पुरोहित

जानकारी के अभाव में कम हो गई है स्नान करने वालों की संख्या

दशाश्वमेध तीर्थ पर स्नान, दान, जप होम, वेदाध्ययन, देवपूजन, संध्योपासन, तर्पण और श्राद्ध इत्यादि पितृकर्म या जो कुछ सत्कर्म किए जाते हैं, वे सब अक्षय कहे गए हैं। प्रतिपदा से दशमी तक प्रत्येक तिथियों में क्रम से स्नान करने वाला पापों से मुक्त हो जाता है। बचपन से ही हम लोग सपरिवार स्नान करते आ रहे हैं। हालांकि जानकारी के अभाव में अब ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में स्नान करने वालों की संख्या कम हो गई है। - कन्हैयालाल त्रिपाठी, अध्यक्ष, काशी तीर्थ पुरोहित समाज

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बचपन में होती थी खूब भीड़

दशाश्वमेध तीर्थ पर स्नान करके दशाश्वमेधेश्वर महादेव के दर्शन करने वालों को गर्भदशा से मुक्ति मिल जाती है। पापों से मुक्ति की कामना से हर साल हम लोग दशाश्वमेध तीर्थ पर स्नान करते आ रहे हैं। बचपन में मैं जब स्नान करने आता था तो भीड़ बहुत ज्यादा हुआ करती थी लेकिन अब तिथि विशेष पर स्नान करने वालों की संख्या साल दर साल कम होती जा रही है। - अजय शर्मा, अध्यक्ष, केंद्रीय ब्राह्मण महासभा

पिताजी से ही सीखा था तीर्थ स्नान

दशाश्वमेध घाट के निकट घर होने के कारण बचपन से पिता जी के साथ नित्य गंगा स्नान और दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी है। ज्येष्ठ मास की प्रतिपदा, गंगा दशहरा और मास दशमी तिथि पर यहां स्नान दान का फल अनंत है। पहले पिताजी के साथ आता था लेकिन अब पिताजी नहीं रहे तो मैं अपने बेटे के साथ ज्येष्ठ मास के स्नान के लिए जरूर आता हूं। स्नान के बाद दान की परंपरा भी निभाई। - कन्हैया दुबे, केडी, गीतकार

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