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रोजाना मैली की जा रही गंगा

Wed, 22 Mar 2017 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो वाराणसी
अमर उजाला ब्यूरो वाराणसी Updated Wed, 22 Mar 2017 01:50 AM IST
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Ganga being dirty daily
गंगा की ये है हालत
शायद ही किसी प्राणी का ऐसा बुरा हाल होगा, जैसा गंगा मां का है। काशी में गंगा को हर कदम पर मैला किया जाता है। गंगा में रोजाना 200 मिलियन लीटर मलजल गिरता है। यही नहीं, छोटे-बड़े 30 नाले भी मिलकर इसे प्रदूषित करते हैं। वरुणा और असि नदी के रास्ते भी सीवर का पानी गंगा में ही गिरता है। नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले में गंगा को जीवित प्राणी का दर्जा मिलने के बाद एक बार फिर गंगा की निर्मलता और अविरलता पर बहस तेज हो गई है।
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  गंगा के निर्मलीकरण तीन हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बाद भी गंगा कहीं सूख रही है तो कहीं किनारा बजबजा रहा है। मोक्षनगरी के 84 घाटों में से 20 से अधिक घाटों पर जहां धोबी कपड़े धो रहे हैं, वहीं कहीं भैंस बांधी जा रही है तो कहीं इन्हें नहलाया जा रहा है। उद्योग धंधों का कचरा नदी में बेरोक-टोक गिराया जा रहा है। गंगा के प्रदूषण का कारण फूल-माला, शव, मरे पशु भी है, जिन्हें नदी में फेंक दिया जा रहा है। सीवेज को गंगा में गिराने से बचाने के लिए कुछ योजनाएं तैयार तो हुईं पर वह परवान नहीं चढ़ सकीं। गोइठहां में 120 एमएलडी और दीनापुर में 140 एमलडी का प्लांट बन रहा है। रमना में 50 एमएलडी का प्लांट प्रस्तावित है।
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