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काशी : 27 साल में तीसरी बार बदली परंपरा, दोपहर में आरती और मंदिरों के कपाट चार बजे के बाद बंद हुए

Wed, 17 Jul 2019 12:02 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Wed, 17 Jul 2019 12:02 AM IST
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ganga Aarti done in afternoon due to Lunar eclipse in kashi
दिन में होती गंगा आरती। - फोटो : अमर उजाला

गुरुपूर्णिमा पर मंगलवार को खंडग्रास चंद्रग्रहण के चलते काशी विश्वनाथ मंदिर को छोड़कर अन्य मंदिर शाम साढ़े 4 बजे बंद हो गए। गंगा आरती भी शाम तीन बजे हुई। ग्रहण के सूतक के चलते बुधवार सुबह बाबा विश्वनाथ की मंगला आरती दो घंटे विलंब से होगी।

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मंगलवार को आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा का खंडग्रास चंद्रग्रहण भारत में भी देखा गया। 2 घंटा 59 मिनट का यह ग्रहण भारतीय समयानुसार रात्रि 1 बजकर 31 मिनट पर शुरू हुआ जो मोक्ष रात्रि 4 बजकर 30 मिनट तक रहा। इस दौरान चांद का आकार आधा ही देखा गया। चूंकि ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक होता है, इसलिए मंलवार शाम साढ़े 4 बजे पूजा पाठ कर मंदिरों के पट बंद कर दिए गए।
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उधर, दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि और गंगोत्री सेवा निधि द्वारा होने वाली सायंकालीन गंगा आरती चंद्रग्रहण के चलते आपराह्न तीन बजे ही करनी पड़ी। गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्र ने बताया कि 1991 से शुरू हुई मां गंगा की आरती 27 सालों में तीसरी बार दिन में हुई। इससे पहले आठ अगस्त 2017 और 27 जुलाई 18 में भी गंगा आरती दोपहर में हुई थी। इस दौरान हनुमान यादव, इंदु शेखर शर्मा, आशीष तिवारी आदि उपस्थित रहे।

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सूतक काल में ‘बाबा’ को चढ़ा फलाहार :
काशी विश्वनाथ मंदिर की परंपरा के अनुसार, ग्रहण के सूतक काल में मंदिर की व्यवस्थाएं यथावत रहीं। भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर के पट खुले रहे। भगवान भोलेनाथ को फलाहार चढ़ाया गया। सप्तऋषि आरती, भोग शृंगार आरती और शयन आरती अपने निर्धारित समय पर हुई। ग्रहण के सूतक के चलते बुधवार सुबह ढाई बजे से होने वाली मंगला आरती 4 बजकर 45 मिनट पर होगी।

रातभर स्नान, जप और अनुष्ठान :
खंडग्रास चंद्र ग्रहण के चलते दोपहर से ही घाटों पर भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। रात में सभी घाट श्रद्धालुओं से पट गए और उन्होंने गंगा स्नान किया। घाट पर जप और अनुष्ठान भी चलते रहे। ग्रहण समाप्त होने के बाद श्रद्धालुओं ने दान पुण्य किया। इस दौरान हर हर महादेव के जयकारे से गंगा तट गूंजते रहे।

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