गणेशोत्सव: शेरवाली कोठी में विराजे लालबाग के राजा, पंडालों में पहुंचीं प्रतिमाएं; यहां विराजमान हैं 11 गणेश
Varanasi News: गणेश का विनायक नाम ही यह प्रमाण है कि गणेश देव सेना के नायक रूप में ही विनायक हैं। काशी की व्यवस्था, रक्षा और सुचारु व्यवस्था में स्वयं ढुंढिराज ने विनायक रूप में कार्य-व्यवहार दायित्व का निर्धारण करने के बाद उसका दायित्व यथास्थान-यथारूप स्थापित किया।
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विस्तार
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के शुभ मुहूर्त में प्रथम पूज्य भगवान गणेश विराजमान होंगे। शिव की नगरी काशी में महाराष्ट्र के गणेशोत्सव का उल्लास नजर आएगा। कहीं लालबाग के राजा के दर्शन होंगे तो कहीं सिद्धिविनायक गणेश के। लड्डू गोपाल के बाद अब प्रकृति के संचालन का जिम्मा भगवान गणेश के हाथों में होगा।
शुक्रवार को दोपहर से ही शहर के गणेश पंडाल और मराठी घरों में विनायक की प्रतिमाएं पहुंचने लगी थीं। गणेशोत्सव पर शहर में डेढ़ से छह फीट की गणेश जी की मूर्तियां स्थापित होंगी। श्री काशी मराठा गणेश उत्सव समिति की ओर से ठठेरी बाजार स्थित शेरवाली कोठी में दोपहर को लालबाग के राजा की साढ़े पांच फीट की प्रतिमा पहुंच गई।
मध्यरात्रि में प्रतिमा को पंडाल में विराजमान कराया गया। उनके साथ महाराष्ट्र के तासगांग सांगली से ढोल तासा का 80 सदस्यीय दल और 60 महिलाओं का दल लोकगान व लोकनृत्य की मनोहारी छटा बिखेरेंगी। कौन बनेगा करोड़पति के अलावा मेहंदी, नृत्य, फैंसी ड्रेस आदि प्रतियोगिताएं होंगी।
नूतन बालक गणेश उत्सव के गणेशोत्सव का आयोजन दुर्गाघाट (घासीटोला) गणेश विद्या मंदिर इंटरमीडिएट कॉलेज में होगा। श्रीणेशोत्सव समिति समिति का अगस्त्यकुंडा में विविध अनुष्ठान और प्रतियोगिताएं होंगी। शारदा भवन गणेशोत्सव अगस्तकुंडा, श्री काशी गणेशोत्सव कमेटी ब्रह्माघाट, श्रीकाशी विद्या मंदिर स्कूल मच्छोदरी, श्रीराम तारका आश्रम आंध्राश्रम मानसरोवर, आईआईटी बीएचयू, अमृत विनायक गणेश मंदिर, श्रीवल्लभराम शालिग्राम सांग्वेद विद्यालय रामघाट में भी सार्वजनिक पूजा होगी। शहर के मराठी परिवार और गणेश मंदिरों में भी एक सप्ताह तक दर्शन पूजन के लिए भीड़ होगी। लोग घरों में भी काफी मूर्तियां स्थापित कर पूजा करेंगे।
भक्त करते हैं पूजन
चतुर्थ विनायक यात्रा निर्देश में कपर्दीश्वर गणेश के दर्शन होते हैं। दूसरे आवरण में तीसरे नंबर पर शूलटंक विनायक का स्थान है। बड़ा गणेश का वर्णन 56 विनायक यात्रा के क्रम में तीसरे आवरण में प्रथम स्थान पर वक्रतुंड विनायक के रूप में मिलता है और अष्ट प्रधान विनायक यात्रा में संदर्भ स्थान पर भी यही स्थान है।
डॉ. उपेंद्र विनायक सहस्त्रबुद्धे का कहना है कि काशी और चतुर्दिक परिक्रमा मार्ग पर कुल मिलाकर 74 गणेश-विनायक मंदिर होने की स्थिति बनती है। लेकिन प्रमुखतः 67 विनायक-गणेश के संदर्भ ही मिलते हैं। अनेक विनायकों के नाम और स्थान ही काशी की रक्षा की भूमिका स्पष्ट करते हैं।
मंदिरों के शहर बनारस में 33 कोटि देवी-देवता विराजमान हैं। सात वार नौ त्योहार की नगरी काशी में भोलेनाथ और मां पार्वती के पुत्र प्रथमेश के 67 पीठ विराजमान हैं। इसमें 11 गणेश पीठ और 56 विनायक पीठ हैं। इनका अलग-अलग महत्व, अलग-अलग छवि और काम भी अलग हैं। महाराष्ट्र के बाद काशी ही है जहां पूरे उत्साह के साथ गणेशोत्सव मनाया जाता है और पंडाल सजाए जाते हैं।
बाबा विश्वनाथ की नगरी की कल्पना गणेशजी के बिना अधूरी है। काशी में चतुर्थ विनायक यात्रा, पंचामृत विनायक यात्रा और अष्ट प्रधान विनायक यात्रा प्रमुख है। अष्ट विनायक यात्रा में प्रथम स्थान यात्रा निर्देश सिद्धि विनायक को प्राप्त है जबकि 56 विनायक के प्रथम आवरण में आठवां स्थान निर्देश भी सिद्धि विनायक रूप को प्राप्त है। इसी तरह 56 विनायक की यात्रा के क्रम में तृतीय आवरण में चतुर्थ स्थान पंचाएम विनायक का है।
दुर्ग की रक्षा करते हैं दुर्ग विनायक
दुर्ग विनायक का दायित्व दुर्ग की रक्षा से संबद्ध होना प्रतीत होता है। इसी तरह देहली विनायक, काशी में प्रवेश की सुरक्षा, (यह स्थान पंचक्रोशी मार्ग पर है, जो काशी का वाह्य आवरण है।), पाशपाणि विनायक-दंडाधिकारी, अविमुक्त विनायक- अविमुक्तेश्वर की निजी सुरक्षा, ज्ञान विनायक- काशी की ज्ञान संपदा (ब्राह्मण वेदपाठी आदि) का संरक्षण, गणनाथ विनायक-गणेश के प्रमुख स्वरूप और काशी के समस्त गणेश विनायक स्वरूपों पर नियंत्रण का दायित्व (गणों के नाथ अर्थात गणनाथ)। इसके अतिरिक्त चतुर्थ विनायकों में शामिल विनायकों में भागीरथी गणाध्यक्ष, भागीरथी अर्थात गंगा की सुरक्षा और बिंदु विनायक-बिंदु माधव की निजी सुरक्षा और काशी में गंगा के उत्तर वाहिनी स्वरूप के केंद्र की सुरक्षा करते हैं।
चतुर्थ विनायक यात्रा
- भागीरथी गणाध्यक्ष- लाहौरी टोला, मकान नंबर-1/40 फुटहा गणेश
- हरिश्चंद्र विनायक-संकठाघाट के पास, सीके 7/166
- कपर्दीश्वर गणपति- पिशाचमोचन सी 21/40
- बिंदु विनायक- बिंदु माधव मंदिर पंचगंगा घाट के 22/36
पंचामृत विनायक यात्रा
- दुग्ध विनायक -दूध विनायक- के 23/66
- दधि विनायक- के 23/65
- घृत विनायक- के 23/56
- मधु विनायक- के 23/63
- शर्करा विनायक- के 28/53
- अष्ट विनायक यात्रा (अष्ट प्रधान विनायक यात्रा)
- सिद्धि विनायक- अमेठी मंदिर मणिकर्णिका घाट के निकट
- त्रिसंध्य विनायक- लाहौरी टोला
- आशा विनायक- मीरघाट
- क्षिप्र प्रसाद विनायक- पितरकुंडा
- ढुंढ़िराज विनायक- अन्नपूर्णा मंदिर मार्ग
- अविमुक्त विनायक- विश्वनाथ मंदिर के नैऋत्य कोण में
- वक्रतुंड विनायक- बड़ा गणेश लोहटिया, राणा महल, चौसट्टी घाट पर सरस्वती विनायक नाम से
- ज्ञान विनायक- गणनाथ विनायक के नाम से खोजवां बाजार