Sakat Chauth: 16 घंटे का व्रत... काशी के बड़ा गणेश मंदिर में भक्तों की लगी कतार, शाम को ऐसे करें पूजा
Varanasi News: गणेश चौथ पर काशी के 56 विनायक, गणेश मंदिरों में सुबह से भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर पूजन-अर्चन किए। वहीं चंद्रोदय रात 8:39 बजे होगा।
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विस्तार
माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि यानी आज श्रद्धालुओं ने गणेश चौथ का व्रत रखा है। ऐसे में वाराणसी स्थित बड़ा गणेश मंदिर में मंगलवार की सुबह से भक्तों की लाइन लगी है। दर्शन- पूजन का सिलसिला जारी है।
जिले में छप्पन विनायक व गणेश मंदिरों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुट रही है। श्रद्धालुओं का यह व्रत 16 घंटे तक जारी रहेगा। महिलाएं संतान की प्राप्ति व लंबी आयु की कामना कर रहीं। बड़ा गणेश मंदिर में भक्तों का रेला भोर से ही लगा है। चंद्रोदय रात 8:39 बजे होगा।
क्या है मान्यता
श्रीगणेशजी का प्राकट्य महोत्सव माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाने की धार्मिक व पौराणिक मान्यता है। इस मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को वक्रतुंड चौथ, माघी चौथ, संकष्टी तिल चतुर्थी, तिल चौथ, तिलकुटा चौथ एवं गौरी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। श्रद्धालु गणेश चौथ का व्रत गणेश जी को समर्पित है। श्रद्धालु सुबह से रात में चंद्रोदय तक व्रत रखकर भगवान गणेश जी का पूजन अर्चन करते हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद गजानन को तिल और गुड़ से बने सवा किलो प्रसाद, दूर्वा और फूल अर्पित कर व्रत का पारण करते हैं।
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इस मंदिर में त्रिनेत्र के रूप में देते हैं दर्शन भगवान गणेश
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ऐसे करें गणपति की पूजा
शुचिता के साथ निराहार व निराजल व्रत रखकर शाम को श्रीगणेश जी की षोडशोपचार पूजा करनी चाहिए। श्रीगणेश जी को अतिप्रिय दूर्वा एवं मोदक, ऋतुफल, मेवे एवं मोदक आदि नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। तिल व गुड़ से बने मोदक अर्पित करने की विशेष मान्यता है। श्रीगणेश स्तुति, संकटनाशन श्रीगणेश स्तोत्र, श्रीगणेश सहस्त्रनाम, श्रीगणेश अथर्वशीर्ष, श्रीगणेश चालीसा का पाठ एवं श्रीगणेश सबंधी मंत्रों का जप करना चाहिए।
पूरे साल के संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत
छह जनवरी, पांच फरवरी, छह मार्च, पांच अप्रैल, पांच मई, तीन जून, तीन जुलाई, दो अगस्त, 31 अगस्त, 29 सितम्बर, 29 अक्तूबर, 27 नवंबर, 26 दिसम्बर को श्रीगणेश चतुर्थी व्रत रखा जाएगा। काशी में प्रमुख श्रीगणेश मन्दिरों में श्रीबड़ा गणेश, श्रीचिन्तामणि गणेश, श्रीदुर्गविनायक गणेश, साक्षी विनायक गणेश, ढुण्डीराज गणेश आदि शामिल है।