Ganesh Chaturthi: गणेशोत्सव पर कोरोना का साया, धर्म नगरी काशी में घर-घर विराजे विघ्नहर्ता
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पिता शिव की नगरी काशी में पुत्र गणेश की जय-जयकार हुई। सार्वजनिक आयोजन रद्द हुए तो गजानन घर-घर विराजे। भक्तों ने विघ्नहर्ता से सुख, समृद्धि, बुद्धि, ज्ञान के साथ ही कोरोना महामारी को दूर करने की कामना की। शनिवार की सुबह वैदिक मंत्रोच्चार और गणेश अथर्वशीर्ष के मंत्रों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। गणपति बप्पा के जयकारे के साथ ही प्रथम पूज्य घरों में विराजे।
आयोजन की भव्यता नहीं है लेकिन आस्था में कोई कमी नहीं है। किसी ने विघ्नहर्ता से कोरोना के विघ्न को दूर करने की कामना की तो किसी ने विश्व शांति की कामना की। सोशल डिस्टेंस और प्रशासन के निर्देशानुसार पूजा समितियों ने पूजन आरंभ कर दिया। घरों में श्री गजानन विराजे तो दस दिनों तक चलने वाला अनुष्ठान भी आरंभ हो गया।
शहर की सबसे पुरानी संस्था श्री काशी गणेश उत्सव समिति का भी नजारा भी बदला रहा। 124 साल से होने वाले आयोजन को सीमित कर दिया गया है। संस्था के उपाध्यक्ष सुधीर चिथरे ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण सिर्फ भगवान गणेश की पूजा अर्चना ही हुई। घरों में भी श्रद्धालुओं ने विधि विधान से गजान की स्थापना की। डाफी स्थित अशोकपुर कालोनी में डॉ. संतोष सिंह ने घर में श्री गणेश जी की स्थापना कर पूजन आरंभ किया।
लगाया 56 भोग, चढ़ाई कोरोनिल
लोकमान्य सार्वजनिक गणेशोत्सव समिति की ओर से भगवान गणेश का पूजन हुआ। उत्सव मंत्री वैभव दीक्षित ने पूजन कर विग्रह की स्थापना की। 12 बजे मध्यान्ह भोग के साथ छप्पन भोग लगाया गया। भगवान गणेश को कोरोना से बचाने के लिए इम्युनिटी बूस्टर किट कोरोनिल भी अर्पित की गई। दोपहर में महिलाओं के हल्दी कुमकुम का आयोजन किया गया। शाम को 21 किलो मोदक का भोग लगाया गया।
काशी विद्या मंदिर में गणेश प्रतिमा का पूजन
कोरोना महामारी के नियमों का पालन करते हुए मच्छोदरी स्थित श्री काशी विद्या मंदिर में श्री काशी विश्वनाथ गणपति महोत्सव के तत्वावधान में सादगीपूर्वक से गणेश पूजन की धार्मिक मान्यताएं निभाई गईं। इस बार प्रांगण में न तो कोई कार्यक्रम हुआ और न ही किसी को प्रवेश दिया गया।
सिर्फ छोटी प्रतिमा हुई स्थापित
नूतन बालक गणेशोत्सव समाज सेवा मंडल के सप्तदिवसीय महोत्सव का ऑनलाइन उद्घाटन हुआ। 110 साल पुरानी नूतन बालक गणेशोत्सव समाज सेवा मंडल की ओर से भगवान गणेश की छोटी सी प्रतिमा स्थापित की गई। ऑनलाइन आयोजन में बीएचयू के डॉ. पतंजलि मिश्रा ने अध्यक्षता की। मुख्य अतिथि जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा और विशिष्ट अतिथि हर्षपाल कपूर रहे।
ऐसे करें पूजन, विषम दिनों में करें विसर्जन
प्रथम पूज्य देव की स्थापना के साथ ही विषम दिनों तक पूजन का विधान है। ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि धूप, अक्षत दीप के साथ ही मोदक चढ़ाकर हर दिन पूजन करना श्रेयस्कर होता है। घर में या मंदिर में प्रतिमा की स्थापना के विषम दिनों तक रखना शुभकारी होता है।
तीन, पांच, सात, 11 दिनों तक स्थापित प्रतिमा का पूजन श्रेयस्कर होता है। आचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि दूर्वा से गंगा जल का छिड़काव कर प्रतिमा स्थल का हर दिन शुद्धिकरण करना चाहिए। सुबह शाम श्री गणेश जी की आरती करने मात्र से ही उनकी कृपा मिलती है।
गणेश मंदिरों में हुआ दर्शन पूजन
गणेश चतुर्थी पर शहर भर के गणेश मंदिरों में दर्शन-पूजन का सिलसिला चलता रहा। लोहटिया स्थित बड़ा गणेश मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश का दर्शन पूजन किया। सतुआ बाबा आश्रम के महामंडलेश्वर संतोष दास ने भी बड़ा गणेश मंदिर में दर्शन किया।