ISS: तैयारी में मदद आई यारी..संगति से सफलता, आईआईटी के पैकेज से भी बड़े थे सपने; पढ़ें मोटिवेशनल स्टोरी
भारतीय सांख्यिकी सेवा में सफलता हासिल करने वालों ने तैयारी को लेकर कई अहम किस्से साझा किए। उन्होंने बताया कि दोस्तों से आईएसएस को लेकर जब सवालों पर विमर्श होते तो काफी कुछ जानने और सीखने को मिल जाता था।
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Varanasi News: एक कमरे में रहकर पढ़ाई करने वाले तीन दोस्तों ने भारतीय सांख्यिकी सेवा (आईएसएस) परीक्षा में सफलता हासिल की है। इनसे अमर उजाला ने बातचीत की तो पता चला कि तैयारी के दौरान यारी बहुत काम आई। दोस्तों को पढ़ता देखकर मोटिवेशन मिला। ऑल इंडिया दूसरी रैंक पाने वाले बनारस के आकाश कुमार शर्मा ने सफलता का श्रेय अपनी संगति को दिया।
श्वेतांक ने कहा कि आईआईटी कानपुर से प्लेसमेंट के बाद 20 लाख सालाना की नौकरी लगी, लेकिन उनका सपना बड़ा था। नौकरी छोड़ तैयारी शुरू की। काशी के किसान के बेटे राहुल ने आईआईटी से एमटेक करते ही सेल्फ स्टडी शुरू की और बाकी के दोनों दोस्त नौकरी छोड़कर आए तो उनके साथ लखनऊ में रहकर एक साल तैयारी की और तीनों का एक साथ चयन हो गया।
तीनों ने बीएचयू में 2017-20 सत्र में यूजी किया था। आईआईटी कानपुर के बाद साथ में नौकरी की और तैयारी के दौरान सभी एक दूसरे का मोटिवेशन बने रहे। आठवीं रैंक पाने वाली विभा मिश्रा ने कहा कि आईआईटी कानपुर में पीजी में चयन होने के बाद भी बीएचयू को नहीं छोड़ा, क्योंकि तैयारी के लिए यहां का सिलेबस सांख्यिकी सेवा के ही पैटर्न पर था।
सांख्यिकी अफसर के इंटरव्यू में पूछी गईं नृत्य शैलियां
विभा मिश्रा ने कहा कि बीएचयू में दाखिला नहीं होता तो वह सांख्यिकी अधिकारी नहीं हो पाती। इसकी वजह यह है कि बीएचयू और इंडियन स्टैटस्टिकल सर्विसेज का सिलेबस एक जैसा है। बीएचयू से यूजी करने के बाद आईआईटी कानपुर में पीजी के लिए चयन हो गया था लेकिन सेलेक्शन इसलिए नहीं लिया कि क्योंकि बीएचयू से एमएससी करना और आईआईएस की तैयारी एक जैसा ही था।
यहां पर सभी प्रोफेसरों ने काफी सपोर्ट किया। प्रो. ज्ञान प्रकाश सिंह मेंटोर थे। इंटरव्यू और लिखित बहुत अच्छा हुआ था। बच्चों की भूखमरी पर किए गए काम को पूछा। फिर राष्ट्रीय और अंतररराष्ट्रीय नृत्य शैलियों को पूछा। लखनऊ और जयपुर घराने के कथक नृत्य के बारे में भी पूछा गया।