कैदियों के उपद्रव से चर्चा में रहने वाला जिला कारागार ने किया ये काम, चार कैदी भेजे गए इस जगह
अपराध पर शिकंजा कसने के लिए शासन ने जेलों के भीतर बंद शातिर बंदियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्देश दिया है। इसके तहत जिला कारागार से भी चार कैदियों को कड़ी सुरक्षा के बीच वाराणसी सेंट्रल जेल भेजा गया है। इसमें एक सजायाफ्ता कैदी भी शामिल है।
कारागार में बढ़ते उपद्रव के कारण कुछ अन्य कैदियों को भी चिह्नित किया गया है। इन्हें भी अन्यत्र जेलों में बहुत जल्द भेजा जाएगा। देखा जाए तो जेल प्रशासन समय-समय पर खूंखार कैदियों को दूसरे जेल में भेजने के लिए शासन को सूची भेजता रहता है।
गाजीपुर जिला जेल एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में कैदियों ने जेल के भीतर जमकर उपद्रव किया था और जेल प्रशासन को पगली घंटी बजानी पड़ी थी। इसके बाद पीएसी के जवानों और जेल प्रशासन ने बंदियों की जमकर पिटाई की थी।
इसके दूसरे दिन जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य तथा पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने जेल का औचक निरीक्षण किया था, जिसमें कई तरह की खामियां मिली थीं।
बंदियों के खान-पान, रहन-सहन और साफ-सफाई को लेकर जेल अधीक्षक को फटकार लगाई गई थी। जेल की सुरक्षा बढ़ाने के लिए उपद्रवी कैदियों और गैंग के सरगना पर कड़ी नजर रखने, सीसीटीवी कैमरे को दुरुस्त करने तथा कैदियों से मिलने आए मुलाकातियों की निरंतर सघन चेकिंग करने का निर्देश दिया था।
आला अफसरों जेल की जांच रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के साथ ही शासन को भेज दी है। फिलहाल जेल में सख्ती बढ़ा दी गई है। प्रत्येक मुलाकाती की मुख्य गेट से प्रवेश करते ही दो स्थानों पर चेकिंग और तलाशी ली जा रही है।
वर्तमान समय में जिला कारागार के विभिन्न बैरकों में 755 कैदी बंद हैं। जेल की चहारदीवारी में मानक से दो गुने कैदियों के होने की वजह से काफी मुश्किलें उठानी पड़ती हैं। जेल में 397 कैदियों के रखने का मानक है। लेकिन करीब दो गुने कैदी इन दिनों बंद हैं। इसमें 124 सजायाफ्ता तथा 40 महिला कैदी भी शामिल हैं। आलम यह है कि सभी बैरकों में मानक से दोगुने कैदी रखे गए हैं।
जेल अधीक्षक राजेंद्र कुमार ने बताया कि जिला कारागार में बंद एक सजायाफ्ता समेत चार कैदियों को सेंट्रल जेल वाराणसी भेज दिया गया है। जिसमें अलीगढ़ के नामी अपराधी सजल चौधरी, माहपुर-गाजीपुर के विमलेश सिंह, वाराणसी के महेंद्र राजभर तथा हरदासपुर-गाजीपुर के पंकज राय शामिल हैं। सभी पर संगीन अपराध दर्ज हैं। इनमें से विमलेश सिंह सजायाफ्ता कैदी है।