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फर्जी टिकट से यात्रा कर रहे चार यात्री पकड़े गए
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बलिया/आजमगढ़। टिकट दलालों ने रेलवे की व्यवस्था में पूरी तरह सेंधमारी कर ली है। बृहस्पतिवार को एक चौंका देने वाला मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ के रायपुर मंडल में पीआरएस काउंटर से तत्काल टिकट बना और उसका प्रिंट आजमगढ़ में निकाल लिया गया। इस पर चार यात्रियों को सफर करते हुए टीटीई ने पकड़ लिया और उन्हें रेलवे सुरक्षा बल को सौंप दिया। रेलवे के अधिकारी पूरे मामले की जांच में जुट गए हैं। पकड़े गए यात्री मुबारकपुर व चिरैयाकोट के बताए जा रहे हैं। उन्होंने ये टिकट मुबारकपुर में एक ट्रैवेल्स एजेंसी से लिए हैं। फर्जी टिकटों के इस खेल में रेल कर्मियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।
ट्रेन नंबर 01060 गोदान एक्सप्रेस में आजमगढ़ से लोकमान्य तिलक टर्मिनल तक का 12 नवंबर को यात्रा करने के लिए तत्काल टिकट बना था। टिकट 11 नवंबर को 11.36 बजे बनाया गया है। चौंकाने वाली बात ये है कि पीआरएस सिस्टम से बने टिकट को बनाने का स्थान बलिया के सुरेमनपुर स्टेशन को दर्शाया गया है। जबकि वास्तव में यह टिकट सुरेमनपुर में नहीं बल्कि रायपुर मंडल के छतीसगढ़ में किसी स्टेशन से बनाया गया है। मामला तब खुला जब गोदान एक्सप्रेस ट्रेन में मंडल वाणिज्य निरीक्षक अखिलेश सिंह ने टिकट की जांच की। यह टिकट लेकर चार यात्री कोच संख्या एस-7 में यात्रा कर रहे थे। आरक्षण चार्ट में भी पीएनआर नंबर व बर्थ नंबर सब सही था लेकिन टिकट बनाने वाले ने एक गलती कर दी थी। टिकट भले छतीसगढ़ में बना लेकिन उस पर टिकट आरक्षित करने वाले स्टेशन का नाम एसआईपी (सुरेमनपुर) दिखाया गया। टिकट देखकर वह चौंक गए क्योंकि टिकट जिस कागज पर प्रिंट किया गया था वह एनआर (नार्दन रेलवे) का है। जबकि सुरेमनपुर में बने किसी भी टिकट के कागज पर एनईआर (नार्दन ईस्टर्न रेलवे) लिखा होना चाहिए। आखिर 24 घंटे में छत्तीसगढ़ से बना टिकट आजमगढ़ कैसे पहुंच गया। इसके पीछे कौन-कौन शामिल है इसकी जांच शुरू हो गई है।
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संदिग्ध है रेल कर्मियों की भूमिका
रेलवे के पीआरएस काउंटर से जिस कागज पर टिकट प्रिंट किया जाता है, वह कागज रेलवे के अपने प्रेस में तैयार किया जाता है। बाकायदा रोल तैयार कर विभिन्न स्टेशनों को उनके नंबरों के आधार पर आवंटित किया जाता है। इस रोल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। इससे आसानी से पता चलता है कि किस नंबर तक का रोल किस स्टेशन को दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि रोल का कागज दलाल तक कैसे पहुंचा या कहीं इस टिकट का प्रिंट किसी स्टेशन के पीआरएस काउंटर से ही तो नहीं निकाला गया है।
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तत्काल आरक्षित टिकट का बनना सुरेमनपुर स्टेशन पर दर्शाया गया है, लेकिन यह टिकट वास्तव में छत्तीसगढ़ में बना है। 24 घंटे में टिकट आजमगढ़ नहीं पहुंच सकता, साफ है कि टिकट की स्क्रीनिंग की गई है। यात्रा करने वाले व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। - अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी, एनईआर वाराणसी मंडल।
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ट्रेन नंबर 01060 गोदान एक्सप्रेस में आजमगढ़ से लोकमान्य तिलक टर्मिनल तक का 12 नवंबर को यात्रा करने के लिए तत्काल टिकट बना था। टिकट 11 नवंबर को 11.36 बजे बनाया गया है। चौंकाने वाली बात ये है कि पीआरएस सिस्टम से बने टिकट को बनाने का स्थान बलिया के सुरेमनपुर स्टेशन को दर्शाया गया है। जबकि वास्तव में यह टिकट सुरेमनपुर में नहीं बल्कि रायपुर मंडल के छतीसगढ़ में किसी स्टेशन से बनाया गया है। मामला तब खुला जब गोदान एक्सप्रेस ट्रेन में मंडल वाणिज्य निरीक्षक अखिलेश सिंह ने टिकट की जांच की। यह टिकट लेकर चार यात्री कोच संख्या एस-7 में यात्रा कर रहे थे। आरक्षण चार्ट में भी पीएनआर नंबर व बर्थ नंबर सब सही था लेकिन टिकट बनाने वाले ने एक गलती कर दी थी। टिकट भले छतीसगढ़ में बना लेकिन उस पर टिकट आरक्षित करने वाले स्टेशन का नाम एसआईपी (सुरेमनपुर) दिखाया गया। टिकट देखकर वह चौंक गए क्योंकि टिकट जिस कागज पर प्रिंट किया गया था वह एनआर (नार्दन रेलवे) का है। जबकि सुरेमनपुर में बने किसी भी टिकट के कागज पर एनईआर (नार्दन ईस्टर्न रेलवे) लिखा होना चाहिए। आखिर 24 घंटे में छत्तीसगढ़ से बना टिकट आजमगढ़ कैसे पहुंच गया। इसके पीछे कौन-कौन शामिल है इसकी जांच शुरू हो गई है।
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संदिग्ध है रेल कर्मियों की भूमिका
रेलवे के पीआरएस काउंटर से जिस कागज पर टिकट प्रिंट किया जाता है, वह कागज रेलवे के अपने प्रेस में तैयार किया जाता है। बाकायदा रोल तैयार कर विभिन्न स्टेशनों को उनके नंबरों के आधार पर आवंटित किया जाता है। इस रोल की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। इससे आसानी से पता चलता है कि किस नंबर तक का रोल किस स्टेशन को दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि रोल का कागज दलाल तक कैसे पहुंचा या कहीं इस टिकट का प्रिंट किसी स्टेशन के पीआरएस काउंटर से ही तो नहीं निकाला गया है।
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तत्काल आरक्षित टिकट का बनना सुरेमनपुर स्टेशन पर दर्शाया गया है, लेकिन यह टिकट वास्तव में छत्तीसगढ़ में बना है। 24 घंटे में टिकट आजमगढ़ नहीं पहुंच सकता, साफ है कि टिकट की स्क्रीनिंग की गई है। यात्रा करने वाले व्यक्ति से पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। - अशोक कुमार, जनसंपर्क अधिकारी, एनईआर वाराणसी मंडल।