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यूपी: दुर्लभ प्रजाति बार्न उल्लू का जोड़ा मिल, देखने वालों की लगी भीड़

Sat, 19 Dec 2020 02:19 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 19 Dec 2020 02:19 PM IST
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Found pair of rare species Barn Owl in bhadohi up
जोड़े में उल्लू। - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले में शनिवार को दुर्लभ प्रजाति बार्न के दो उल्लू मिले। ग्रामीणों के अनुसार, यह नर और मादा उल्लू का जोड़ा है। वन विभाग को सूचना दी गई है। कुछ दिन पूर्व इसी गांव में इसी प्रजाति का एक उल्लू मिला था।

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सुरियावां ब्लॉक क्षेत्र के कोछिया गांव निवासी मुन्नर राम यादव के घर के सामने सड़क पर दुर्लभ प्रजाति का बार्न उल्लू मिला। कुछ दिन पहले आलू के खेत में उल्लू मिला था। उसे वन विभाग के अधिकारियों ने कब्जे में ले लिया था।
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इस बार उल्लू का जोड़ा मिला है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इस बार पक्षी को सारनाथ स्थित चिड़ियाघर में पहुंचाया जाए। अन्यथा इनकी जान बचनी मुश्किल हो जाएगी, क्योंकि वे कुछ खा-पी नहीं रहे हैं।
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सफेद और नारंगी रंग के अनोखे पक्षी को देखने के लिए भीड़ जुट गई। वन्य अधिकारियों के अनुसार, इस पक्षी को वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के शेड्यूल तीन में स्थान दिया गया है। बार्न उल्लू की औसत आयु चार वर्ष होती है। कुछ मामलों में यह लगभग 15 वर्ष तक जीवित रहे हैं।

पवित्र माना जाता है बार्न उल्लू
देश के विभिन्न भागों में बार्न उल्लू को पवित्र माना जाता है। स्वभाव से बार्न उल्लू शर्मीला और शांत होता है। इसकी आवाज सामान्य उल्लू के समान नहीं होती है। इसकी आवाज कर्कश होती है। यह कृषक मित्र होने की वजह से रात में खलिहान में रुकता है। अनाज खाने के लिए आने वाले जंतुओं का शिकार करता है।

यह खेत में लगी फसलों को कीट पंतग से भी बचाता है। इस प्रजाति के उल्लू अक्सर जोड़े में ही रहते हैं। यह सूखी जगह, पुराने मकानों में, घर और खंडहर, पुराने किलों में निवास करते हैं। ये पक्षी पीपल, बरगद, गूलर जैसे बड़े पेड़ों पर खोखले भाग में अपना निवास बनाते हैं। बार्न उल्लू रात्रिचर होते हैं।

इनका भोजन मुख्य रूप से चूहे होते हैं। प्रतिवर्ष चार से सात सफेद चिकने गोलाकार अंडे देते हैं। ऐसी स्थिति में नर ही भोजन का प्रबंध करता है और मादा अंडों को सुरक्षित रखने का कार्य करती है।

यह है विशेषता
बार्न उल्लू अब व्यापक रूप से पाया जाने वाला रात्रिचर उल्लू है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि अन्य प्रकार के उल्लुओं के बीच यह अंतर करता है। इसके लंबे पैर, लंबे ताल और छोटी आंखें हैं।

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