मिर्जापुर: विंध्य की वादियों में मिले सैकड़ों साल पुराने जीवाश्म, मानव विकास को समझा सकते हैं
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मिर्जापुर जिले के विंध्य पर्वत श्रृंखला की पहाड़ी वादियों में बसा राजगढ़ क्षेत्र, असीम धरोहर अपने उदर(पेट) में समेटे हुए हैं। पिछले दिनों राजगढ़ पुलिस चौकी के बगल में स्थित प्राचीन बड़वा महादेव मंदिर में स्थापित शिवलिंग एवं उसके आसपास पत्थरों पर जीवाश्म(फासिल्स) मिला है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिक प्रोफेसर सुभाष यादव को मेल पर इन तस्वीरों को भेजकर, इसके बारे में पता कराया। उन्होंने बताया कि विश्व धरोहर के रूप में सोनभद्र जिले के सलखन क्षेत्र में पाई गई जीवाश्म धरोहर का हूबहू प्रतिरूप राजगढ़ क्षेत्र में भी है।
उन्होंने कहा यह सैकड़ों वर्ष पुराने पत्थर के क्षरण एवं उस समय उस पर से गुजरे जानवरों के पद चिह्नों का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि जल्द ही इसे यहां से उठाकर सुरक्षित पुरातत्व विभाग के सोनभद्र के शिवद्वार में स्थित संग्रहालय में रखा जाएगा।
लेकिन ज्ञात होने के एक वर्ष बाद भी क्षेत्र में मिले जीवाश्म की सुरक्षा न के बराबर है। आसपास के लोग जीविकोपार्जन के लिए उन पत्थरों को तोड़कर पुरानी धरोहरों को मिटाने में लगे हुए हैं। शासन प्रशासन की ओर से भी इसे संरक्षित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
इन पहाड़ियों में उगते हुए सूरज, चांद, गाय के खुर के चित्र निशान आज भी हैं। जिन्हें लोग तोड़कर जमीन कब्जा करने में लगे हुए हैं। बुद्धजीवी लोगों ने मांग की है कि इसको उठाकर सुरक्षित संग्रहालय में रखवाया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस पर अध्ययन कर सकें।