Varanasi News: केवल 27 बेड के बर्न वार्ड के भरोसे 40 लाख की आबादी, सर्जन करते हैं बर्न मरीजों का इलाज
Varanasi News: इस समस्या के कारण सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को काफी समस्याएं होती हैं। यही कारण है कि मरीज और तीमारदार निजी अस्पतालों में जाने को मजबूर हैं। हालत यह है कि झुलसे मरीजों को इमरजेंसी में रखकर उनका इलाज किया जाता है। दूसरे अस्पतालों में आए मरीजों को भी मंडलीय अस्पताल ही भेज दिया जाता है।
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वाराणसी के सरकारी अस्पतालों में एक भी प्लास्टिक सर्जन नहीं है। साथ ही बेड की कमी भी लंबे समय से बनी है। ऐसे में बर्न मरीजों का बेहतर इलाज किसी चुनौती से कम नहीं है। करीब 40 लाख की आबादी वाले जिले में बीएचयू में केवल 7 बेड का बर्न वार्ड और मंडलीय अस्पताल में 20 बेड का बर्न वार्ड है। मंडलीय अस्पताल में झुलसे मरीजों का इलाज प्लास्टिक सर्जन की जगह सर्जन करते हैं।
जिले के तीन सरकारी अस्पतालों (मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल, शास्त्री अस्पताल रामनगर) में झुलसे मरीजों का इमरजेंसी में रखकर प्राथमिक उपचार किया जाता है। जिले में केवल मंडलीय अस्पताल में ही बर्न वार्ड है। दूसरे अस्पतालों से भी यहीं पर मरीजों को रेफर किया जाता है।
नियमानुसार जलने वाले मरीजों का इलाज प्लास्टिक सर्जन को करना चाहिए, लेकिन मंडलीय अस्पताल में करीब दस साल पहले डॉ. एके प्रधान के रिटायर होने के बाद से किसी की तैनाती नहीं हो सकी। लिहाजा सर्जन समेत दूसरे चिकित्सकों के भरोसे ही बर्न वार्ड का संचालन किया जा रहा है। बेड का संकट भी बना है।
गर्मी में बढ़ जाती हैं आग लगने की घटनाएं
आम तौर पर गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। इसमें कहीं ट्रांसफार्मर जलने से घटनाएं होती हैं तो कहीं खेतों में फसल कटाई के बाद आग लगाने की वजह से घटनाएं होती हैं। इसके अलावा अन्य घटनाएं होती हैं और कई झुलस जाते हैं। उसके इलाज के लिए बीएचयू, मंडलीय अस्पताल ही एक मात्र जगह है। अगर यहां सुविधाएं नहीं बढ़ाई गईं तो समस्या बढ़ सकती हैं।
बीएचयू में भी सुविधाएं नाकाफी, महज सात बेड की सुविधा
बीएचयू अस्पताल में बर्न वाले मरीजों के लिए सुविधाएं भी नाकाफी हैं। यहां सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भी केवल सात बेड बर्न के मरीजों के लिए हैं, जो अधकितर समय फुल ही रहते हैं। यहां न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के जिलों से भी मरीज रेफर होकर आते हैं।
इस तरह की स्थिति तब है जब बीएचयू अस्पताल में प्लास्टिक सर्जरी विभाग हैं और यहां विशेषज्ञ भी हैं। ट्रॉमा सेंटर परिसर में 50 बेड का बर्न वार्ड बनाया जाना है। इसके बाद जलने की घटनाओं में घायलों के इलाज में राहत होगी।
वर्जन
बर्न के मरीजों के लिए शास्त्री अस्पताल में 20 बेड का नया वार्ड बनाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा मंडलीय अस्पताल में सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक बनने के बाद भी बर्न वार्ड, प्लास्टिक सर्जन की तैनाती सहित अन्य सुविधाएं रहेंगी। - डॉ. संदीप चौधरी, सीएमओ