अर्थ बल पर हावी हो रही तकनीकी के लिए लोकपाल की आवश्यकता: गोविंदाचार्य
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व विचारक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि अर्थ बल के ऊपर तकनीकी ताकत हावी हो रही है। इसके लिए लोकपाल की आवश्यकता है। समाज संस्कार से है, सत्ता का रोल दोयम है। सोमवार को डुमराव बाग स्थित एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से गोविंदाचार्य ने कानून व्यवस्था पर कहा कि बड़ों का लिहाज और आंखों की शर्म ही पुलिस की व्यवस्था होनी चाहिए।
दो सितंबर से दो अक्टूबर तक अध्ययन प्रवास पर निकले गोविंदाचार्य ने चीन के सवाल पर कहा कि आर्थिक और सामरिक दृष्टिकोण से भारत को मजबूत होना पड़ेगा। कैलाश मानसरोवर के लिए विश्व अनुकूल जनमत तैयार करना होगा। कृषि बिल के सवाल पर कहा कि अभी बिल का अध्ययन नहीं किया है।
राजनीति में दोबारा जाने के सवाल पर कहा कि 12 साल तक राजनीति में रहा। अब सज्जन शक्ति को जुटाने में लगे हैं। भारत का सभ्यता मूलक आग्रह अब जोर पकड़ रहा है। दुनिया को भारत की जरूरत अधिक है, जबकि भारत को दुनिया की जरूरत कम है। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत को स्वदेशी के विकास के अनुरूप बताया। बॉलीवुड में मचे बवाल के सवाल पर कहा कि इससे बड़े-बड़े मुद्दे हैं। इस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।
सजगता और सावधानी बरतने की जरूरत
अध्ययन प्रवास के बारे में बताया कि 20 साल पहले 9 सितंबर अध्ययन अवकाश लिया था। तब मैं संघ का प्रचारक और भाजपा का महासचिव था। उस समय देश और दुनिया आर्थिक करारों के दौर से गुजर रही थी। मैं चाहता था कि भारत जैसा देश इस दौर में सजगता एवं सावधानी बरतें। हमारे पास अकूत साधन एवं अपार बौद्धिक क्षमता है।
कहीं हमारी भूल से यह सब चीजें गिरवी ना रख दी जाए और ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी हजारों कंपनियां भारत को अपने शिकंजे में जकड़ सकती है। राष्ट्रीय स्वाभिमान परिषद की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का समापन गांधी जयंती वाले दिन होगा। इसके पूर्व संकटमोचन में दर्शन-पूजन किया और रामनगर में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद से बक्सर के लिए रवाना हो गए।