पूर्व ओलंपियन मोहम्मद शाहिद सुपुर्द-ए-खाक
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काशी की धरती पर पैदा हुआ लाल आज जब खामोशी के साथ खजुरी स्थित अपने घर से कभी न लौटकर आने के लिए निकला तो मानो पूरा शहर रो पड़ा। अपने उस्ताद के अंतिम दर्शन को आए पूर्व भारतीय कप्तान धनराज पिल्लई तो इतने भावुक हो गए कि उनकी आंखों से आंसुओं की धार फू ट पड़ी। वह शाहिद के पार्थिव शरीर को अपलक खामोशी से निहारते रहे।
जनाजे से पहले शाहिद के के साथ के खिलाड़ियों जफर इकबाल और अशोक ध्यानचंद ने उनके शव पर तिरंगा चढ़ाया। उसके बाद वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियाें ने पुष्प गुच्छ चढ़ाए। पार्थिव शरीर सबसे पहले पुलिस लाइन के पास दायम खां मसजिद पहुंचा। यहां बीच वाली मसजिद के इमाम मौलाना नूरआलम ने जनाजे की नमाज पढ़ाई। पीएसी के जवानों ने पद्मश्री शाहिद को गार्ड आफ ऑनर पेश किया। इसके बाद जनाजा टकटकपुर स्थित कब्रिस्तान के लिए रवाना हुआ। खेल, राजनीति, समाजसेवा, उद्योग समेत अलग-अलग क्षेत्रों के हजारों लोग जनाजे में शरीक हुए।
जनाजे में प्रदेश के खेलमंत्री रामसकल गुर्जर, खेल निदेशक आरपी सिंह, साई के क्षेत्रीय निदेशक राजेंद्र सिंह, डीएम विजय किरन आनंद, डीआईजी डॉ. संजीव गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर, ओलंपियन जफर इकबाल, धनराज पिल्लई, अंबुज श्रीवास्तव, अब्दुल अजीज, रवींद्र पाल सिंह, अशोक ध्यानचंद, सरदारा सिंह, देवेंदर सिंह, सुधीर कुमार, प्रवीण सिंह, प्रशांत सिंह, उप्र अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन शकील अहमद बबलू, नूरआलम, कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा, सपा नेता मनोज राय धूपचंडी, ओपी सिंह, भाजपा नेता राकेश त्रिवेदी, यूपी फुटबाल संघ के महासचिव मो. शम्सुद्दीन आदि शामिल थे। उल्लेखनीय है कि अर्जुन अवार्डी शाहिद लीवर और किडनी के संक्रमण से जूझ रहे थे। बुधवार की सुबह गुड़गांव के मेदांता हास्पिटल में उनकी मौत हो गई थी।