टीएमसी में शामिल होने के बाद ललितेश बोले: करेंगे आदर्श की राजनीति, नवंबर में बनारस आएंगी सीएम ममता बनर्जी
कांग्रेस छोड़कर तृणमूल में शामिल होने वाले पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी ने रविवार को वाराणसी में प्रेस वार्ता की। कहा कि कांग्रेस छोड़ने का फैसला मेरे लिए पद और सत्ता की किसी सौदेबाजी के लिए उठाया गया कदम नहीं था।
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कांग्रेस छोड़कर तृणमूल (टीएमसी) में शामिल होने वाले पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी ने कहा कि जिन ताकतों से असहमत रहा, उनसे समझौता संभव नहीं है। मैं काशी की धरती का बेटा हूं और काशी की पहचान कभी राजसत्तात्मक नहीं है। पिछले कुछ सालों से काशी के स्वरूप और मिजाज को बदलने की जो कोशिश हो रही है, वह चिंता का विषय है।
उन्होंने आरोप लगाया कि काशी को नागपुर और गंगा घाटों को चौपाटी बनाने का षड्यंत्र चल रहा है। ललितेश ने कहा कि कांग्रेस छोड़ने का फैसला मेरे लिए पद और सत्ता की किसी सौदेबाजी के लिए उठाया गया कदम नहीं था। हमारा उद्देश्य साफ है कि हम गांधी नेहरू की विचारधारा और अपने परदादा पं. कमलापति त्रिपाठी से मिले आदर्शों के माध्यम से जनसेवा की राजनीतिक भूमिका निभा सकें।
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व में यह कार्य बखूबी संभव है, क्योंकि उन्होंने सांप्रदायिक एवं लोकतंत्र विरोधी राजनीतिक शक्तियों से सीधा टकराने की मिसाल हम सबके सामने रखी है। तृणमूल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नीरज राय ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अगले महीने बनारस दौरे पर आएंगी।
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चुनाव लड़ना और सरकार बनाना हमारा उद्देश्य नहीं
क्या ममता की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे ललितेश
कांग्रेस से चार पीढ़ियों का नाता तोड़ने के बाद ललितेश पति त्रिपाठी के लिए पूर्वांचल में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए जमीन तैयार करना गंभीर चुनौती होगी। रविवार को कांग्रेस के 25 पुरनियों ने कांग्रेस का दामन छोड़कर तृणमूल का झंडा थाम लिया।
ललितेश ने बताया कि ममता बनर्जी के बनारस आगमन पर कई बड़े चेहरे और पूर्वांचल के जिलों से नेता तृणमूल में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि पार्टी विधानसभा चुनाव में किसी न किसी दल के साथ गठबंधन भी कर सकती हैं। नाराज कांग्रेसियों के लिए ललितेश ने एक विकल्प भी खोल दिया है।
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