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आर्थिक तंगी का शिकार नेशनल फुटबालर का परिवार
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वाराणसी। छित्तूपुर की रहने वाली नेशनल फुटबालर (गोलकीपर) ममता कुमारी का परिवार भी लॉकडाउन में आर्थिक और खाने के लिए जूझ रहा है। ममता ने बताया कि पिता रतनलाल बीएचयू में जूते-चप्पल के मरम्मत का काम करते थे और भाई गोपाल टाइल्स लगाने का काम करता था। जिससे परिवार के छह सदस्यों का खर्च चलता था। मगर लॉकडाउन में कोई काम काज नहीं हो पा रहा। जिससे अब परिवार के छह सदस्यों का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
मां सरोज ने बताया कि मेरे परिवार में छह सदस्य हैं। लॉकडाउन में पति और बेटे का काम बंद हो गया। जमा पूंजी भी खत्म हो गई। परिवार के छह सदस्यों के लिए मिलने वाला सरकारी राशन चार लोगों के लिए ही मिलता है। ऐसे में घर चलाना काफी मुश्किल हो रहा है। बीएचयू में स्कूली बच्चों को निशुल्क फुटबाल प्रशिक्षण देने वाले गोपाल प्रसाद ने बताया कि ममता पांच साल से बीएचयू के एम्फीथिएटर मैदान में फुटबाल प्रशिक्षण लेती थी। जिसने अपने फुटबाल कॅरियर में उड़ीसा और मणिपुर में दो बार नेशनल और तीन बार स्टेट प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस दौरान अपने टीम की बेस्ट गोलकीपर भी रही। लॉकडाउन में उसके घर की स्थिति बेहद गंभीर है। अगर आने वाले दिनों में ऐसी ही स्थिति रही तो रोज कमाने खाने वाले ऐसे लोग को भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है।
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मां सरोज ने बताया कि मेरे परिवार में छह सदस्य हैं। लॉकडाउन में पति और बेटे का काम बंद हो गया। जमा पूंजी भी खत्म हो गई। परिवार के छह सदस्यों के लिए मिलने वाला सरकारी राशन चार लोगों के लिए ही मिलता है। ऐसे में घर चलाना काफी मुश्किल हो रहा है। बीएचयू में स्कूली बच्चों को निशुल्क फुटबाल प्रशिक्षण देने वाले गोपाल प्रसाद ने बताया कि ममता पांच साल से बीएचयू के एम्फीथिएटर मैदान में फुटबाल प्रशिक्षण लेती थी। जिसने अपने फुटबाल कॅरियर में उड़ीसा और मणिपुर में दो बार नेशनल और तीन बार स्टेट प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इस दौरान अपने टीम की बेस्ट गोलकीपर भी रही। लॉकडाउन में उसके घर की स्थिति बेहद गंभीर है। अगर आने वाले दिनों में ऐसी ही स्थिति रही तो रोज कमाने खाने वाले ऐसे लोग को भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है।
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