तकनीक पर होगी बात: ठोस, द्रव और गैस के बाद पदार्थ की चौथी अवस्था की प्लाज्मा प्रदर्शनी; बीएचयू में होगा आयोजन
बीएचयू के भौतिक विज्ञान विभाग में पदार्थ की चौथी अवस्था प्लाज्मा पर प्रदर्शनी का आयोजन 12 से 16 अक्तूबर तक किया जाएगा। प्रदर्शनी में लाइव प्लाज्मा, वर्चुअल रियलिटी (वीआर) समेत आधुनिक तकनीकों के माध्यम से विद्यार्थियों और लोगों को प्लाज्मा के गुण व उपयोग बताए जाएंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य जटिल वैज्ञानिक अवधारणाओं को प्रयोगात्मक और रोचक तरीके से समझाना है।
विस्तार
बीएचयू में पहली बार ठोस, द्रव और गैस के बाद पदार्थ की चौथी अवस्था प्लाज्मा प्रदर्शनी लगेगी। कमरे की ट्यूब लाइट से लेकर प्लाज्मा कटिंग, प्लाज्मा लैंप और कचरा साफ करने की तकनीक दिखाई जाएगी।
भौतिक विज्ञान विभाग में 12 से 16 अक्तूबर तक पांच दिनों का कार्यक्रम होगा। इसमें लाइव प्लाज्मा, वीआर यानी कि वर्चुअल रियलिटी, घावों के भरने, केमिकल फ्री टेक्नोलॉजी, ठोस सतह को मजबूत बनाने, स्टील को काटने, बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीवों को निष्क्रिय करने आदि पर आधारित प्रदर्शन लगेगी। बीएचयू के साथ ही गुजरात के इंस्टीट्यूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च की ओर से ये कार्यक्रम किया जा रहा है, जिसे पांच भागों में रखा गया है।
प्लाज्मा नाइट्राइडिंग, ऑपरेशन ऐट रूम टेंपरेचर, प्लाज्मा पाइरोलाइसिस, प्लाज्मा लैंप और रेसोनेंट ट्रांसफार्मर एंड वायरलेस पावर के तहत अलग-अलग कार्यक्रम हैं। प्लाज्मा रोगाणुओं का खात्मा करता है।
वहीं, बिना किसी थर्मल क्षति (गर्मी से होने वाले नुकसान) के रिएक्टिव स्पीशीज के माध्यम से पैथोजन्स और कीटाणुओं को मारता है। वहीं यह टिश्यू रीजेनरेशन (ऊतकों के पुनर्निर्माण) को बढ़ावा देता है और घावों को तेजी से भरता है। इसमें क्विज़, फन, गेमिंग, ट्रेनिंग कार्यक्रम और फ्री थोमेट आदि कार्यक्रम होंगे।
प्लाज्मा की धार से कट जाती है स्टील
ट्यूबलाइट और सीएफएल के अंदर गैस को इलेक्ट्रिक ऊर्जा देकर प्लाज्मा बनाया जाता है, जिससे रोशनी पैदा होती है। प्लाज्मा कटिंग मशीनों में बेहद गर्म प्लाज्मा की धार से स्टील और दूसरी धातुओं को काटा जाता है। धातुओं की मजबूती प्लाज्मा नाइट्राइडिंग से मशीन के पुर्जों की सतह को ज्यादा कठोर और घिसाव-रोधी बनाया जा सकता है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स माइक्रोचिप और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाने की कई प्रक्रियाओं में प्लाज्मा का इस्तेमाल होता है। प्लाज्मा पाइरोलाइसिस से कचरे को बहुत ज्यादा तापमान पर तोड़कर उसका निस्तारण किया जा सकता है।