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महंगाई और गर्मी से मुरझाया फूलों का कारोबार
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चैत्र नवरात्र में इस बार गर्मी और महंगाई से फूलों का कारोबार मुरझा गया है। फूलों की खेती करने वाले किसानों को निराशा हाथ लगी है। मार्च में औसत से अधिक तापमान रहने के कारण खेतों में लगे फूलों के पौधे तैयार होने से पहले सूख गए, इससे फूलों के उत्पादन में कमी आई है। गर्मी तो बढ़ी ही साथ ही महंगाई की मार से भी किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि उम्मीद नहीं थी कि मार्च के महीने में ही इतनी गर्मी पड़ेगी। नवरात्र के समय में पूरे पूर्वांचल में यहां से जाने वाले फूल और माला की मांग भी महंगाई के चलते कम हुई है।
त्योहार हो या शादी गेंदे के फूल की मांग सबसे अधिक होती है। लेकिन इस साल फूलों पर भी महंगाई की मार देखने को मिल रही है। जिस गेंदे के फूल की एक माला 15 रुपये में मिलती थी, वही अब 40 रुपये की हो गई है। किसानों का कहना है कि फूलों में उपयोग होने वाले कीटनाशकों के दाम बढ़ गए हैं। 20 रुपये रोजाना लगने वाला मंडी शुल्क अब 25 रुपये हो गया है। नवरात्र में विंध्याचल जाने वाले फूलों की मांग में भी कमी आई है। इस समय यहां से विंध्याचल गुड़हल, तुलसी, गेंदे एवं बेले के फूल भेजे जा रहे हैं। डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने से बाहरी फूल व्यापारियों का आवागमन भी कम हुआ है।
फूल की माला पहले अब
गेंदा 1500 रुपये सैकड़ा 4000 रुपये सैकड़ा
बेला 500 रुपये सैकड़ा 700 रुपये सैकड़ा
छोटी बेला 250 रुपये सैकड़ा 400 रुपये सैकड़ा
गुलाब 25 रुपये प्रति पीस 40 रुपये प्रति पीस
गुड़हल 200 रुपये सैकड़ा 400 रुपये सैकड़ा
- पहले 10 बिस्वा में फूलों की खेती की थी, लेकिन इस बार गर्मी के चलते काफी नुकसान हुआ है। फूल तैयार होने से पहले ही सूख जा रहे हैं।- राजकुमार, रोहनिया
- बेला का फूल उगाने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत होती है, लेकिन डीजल और कीटनाशक महंगा होने से काफी असर पड़ा है। - संतोष कुमार मौर्य, सारनाथ
- इस बार लग रहा था कि अच्छी कमाई होगी, लेकिन गर्मी के वजह से फूल ही खराब हो जा रहे हैं, इस वजह से फूल महंगे मिल रहे हैं।- राम शरण पाल, शिवपुर
- सबसे ज्यादा नुकसान गर्मी की वजह से हुआ है। बाहर से आने वाले कारोबारी भी महंगाई की वजह से यहां नहीं पहुंच पा रहे हैं।- विशाल दुबे, किसान मंडी संचालक
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त्योहार हो या शादी गेंदे के फूल की मांग सबसे अधिक होती है। लेकिन इस साल फूलों पर भी महंगाई की मार देखने को मिल रही है। जिस गेंदे के फूल की एक माला 15 रुपये में मिलती थी, वही अब 40 रुपये की हो गई है। किसानों का कहना है कि फूलों में उपयोग होने वाले कीटनाशकों के दाम बढ़ गए हैं। 20 रुपये रोजाना लगने वाला मंडी शुल्क अब 25 रुपये हो गया है। नवरात्र में विंध्याचल जाने वाले फूलों की मांग में भी कमी आई है। इस समय यहां से विंध्याचल गुड़हल, तुलसी, गेंदे एवं बेले के फूल भेजे जा रहे हैं। डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने से बाहरी फूल व्यापारियों का आवागमन भी कम हुआ है।
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फूल की माला पहले अब
गेंदा 1500 रुपये सैकड़ा 4000 रुपये सैकड़ा
बेला 500 रुपये सैकड़ा 700 रुपये सैकड़ा
छोटी बेला 250 रुपये सैकड़ा 400 रुपये सैकड़ा
गुलाब 25 रुपये प्रति पीस 40 रुपये प्रति पीस
गुड़हल 200 रुपये सैकड़ा 400 रुपये सैकड़ा
- पहले 10 बिस्वा में फूलों की खेती की थी, लेकिन इस बार गर्मी के चलते काफी नुकसान हुआ है। फूल तैयार होने से पहले ही सूख जा रहे हैं।- राजकुमार, रोहनिया
- बेला का फूल उगाने के लिए ज्यादा पानी की जरूरत होती है, लेकिन डीजल और कीटनाशक महंगा होने से काफी असर पड़ा है। - संतोष कुमार मौर्य, सारनाथ
- इस बार लग रहा था कि अच्छी कमाई होगी, लेकिन गर्मी के वजह से फूल ही खराब हो जा रहे हैं, इस वजह से फूल महंगे मिल रहे हैं।- राम शरण पाल, शिवपुर
- सबसे ज्यादा नुकसान गर्मी की वजह से हुआ है। बाहर से आने वाले कारोबारी भी महंगाई की वजह से यहां नहीं पहुंच पा रहे हैं।- विशाल दुबे, किसान मंडी संचालक