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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Five lakh people will come to Kashi to offer prayers to their ancestors, Pitru Paksha begins on September 27.

Varanasi News: पितरों के तर्पण के लिए काशी आएंगे पांच लाख लोग, 27 सितंबर से शुरू हो रहा पितृपक्ष

Thu, 10 Sep 2026 12:58 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 10 Sep 2026 12:58 AM IST
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Five lakh people will come to Kashi to offer prayers to their ancestors, Pitru Paksha begins on September 27.
वाराणसी। आगामी 27 सितंबर से शुरू होने वाले पितृपक्ष में पूर्वजों के उद्धार और अकाल मृत्यु का ग्रास बनी अतृप्त आत्माओं को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाने के लिए इस बार देश-विदेश से करीब पांच लाख श्रद्धालु काशी पहुंचेंगे। इसके अलावा पितृऋण से मुक्ति और पितृदोष निवारण के लिए अमेरिका, फ्रांस, इटली, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस और नेपाल समेत 10 से अधिक देशों में रहने वाले अप्रवासी भारतीय व श्रद्धालु अभी से तीर्थ पुरोहितों से संपर्क साध रहे हैं। पितृपक्ष के 15 दिनों के दौरान विशेष कर्मकांडों की अग्रिम बुकिंग का सिलसिला जोरों पर है। इसके लिए पुरोहित पांच हजार से 20 हजार रुपये तक चार्ज कर रहे हैं।
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सनातन मान्यताओं के अनुसार, जिन लोगों का निधन असमय हुआ हो या जिनके अंतिम संस्कार की विधियां किसी कारणवश अपूर्ण रह गई हों, उनके लिए पिशाचमोचन स्थित पवित्र विमलोदक कुंड पर अनुष्ठान करना सर्वोत्तम माना जाता है। महंत नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि यहां नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण जैसे विधान किए जाते हैं, जिससे भटकी हुई आत्माओं को तुरंत प्रेत योनि से मुक्ति मिलकर मोक्ष की प्राप्ति होती है। पवित्र विमलोदक तीर्थ में तर्पण करने से पूर्वजों की तीन पीढ़ियों को तृप्ति मिलती है और परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है।
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तीन पीढ़ियों और तीनों गुणों की शांति के लिए त्रिपिंडी

ज्योतिषाचार्यों और तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक, त्रिपिंडी श्राद्ध में सत्व, रज और तम तीनों प्रवृत्तियों से जुड़ी आत्माओं की संतुष्टि के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश के निमित्त जौ, तिल और चावल के तीन अलग-अलग पिंड अर्पित किए जाते हैं। पिशाचमोचन कुंड पर स्थित विमलोदक तीर्थ में तर्पण करने से अकाल मृत्यु से पीड़ित आत्माओं को तत्काल प्रेत योनि से मुक्ति मिलती है।
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कुंड की सफाई हो तो सुधरे व्यवस्था

महज 17 दिनों बाद शुरू हो रहे पितृपक्ष से पहले ऐतिहासिक पिशाचमोचन कुंड की स्थिति बेहद खस्ताहाल है। बारिश के मौसम में कुंड की सीढ़ियों और तर्पण स्थल पर भारी गंदगी व फिसलन जमा है। देशभर से पूर्वजों के उद्धार और पिंडदान के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को इस दुर्दशा से भारी परेशानी हो सकती है। प्रशासन से तत्काल सफाई की मांग की गई है।
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