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पहले खुद सीखी हिंदी, अब जापानी सिखा रहीं
अमर उजाला ब्यूरो वाराणसी।
Updated Tue, 08 Dec 2015 01:55 AM IST
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खुद हिंदी सीखने भारत आईं थीं, लेकिन आज लोगों को जापानी भाषा पढ़ाते हुए 13 साल गुजर गए। करीब 14 साल पहले जापान से भारत आईं सुजुकी चियाकी बीएचयू में जापानी भाषा पढ़ा रही हैं। हिंदी सीखने की ललक ही उन्हें भारत लेकर आई थी। दिल्ली के केंद्रीय हिंदी संस्थान से उन्होंने पहले डिप्लोमा किया लेकिन काशी और बीएचयू का नाम उन्हें यहां ले आया। बीएचयू से उन्होंने पहले हिंदी में डिप्लोमा कोर्स किया, इसके बाद लिंग्विस्टिक में एमए। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें बीएचयू में जापानी भाषा पढ़ाने का मौका मिल गया। तब से वे काशी की ही होकर रह गईं।
सुजुकी चियाकी बताती हैं कि भारत और जापान का रिश्ता बहुत पुराना है और इसकी खास वजह सारनाथ है। वहीं से हमारा रिश्ता प्रगाढ़ हुआ है और अब जापान के प्रधानमंत्री के काशी आने से इस रिश्ते को और मजबूती मिलेगी। सुजुकी बताती हैं कि नरेंद्र मोदी जब प्रधानमंत्री नहीं थे, शिंजो अबे से उनकी मित्रता तब से ही थी। प्रधानमंत्री के बाद ये दोस्ती और गहरी हुई है और इसका सकारात्मक असर दोनों देशों पर आने वाले दिनों में दिखेगा।
विकास और व्यापार दोनों ही क्षेत्र में भारत को फायदा होगा। जापान हर तरह से भारत का सहयोग करने को तैयार है। सुजुकी बताती हैं कि यहां लोगों में जापानी भाषा सीखने का बड़ा क्रेज है। इस वक्त करीब 100 स्टूडेंट्स जापानी भाषा की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल मेरी इच्छा यहीं पर जापानी भाषा को नया आयाम देने की है। अगर इसमें सफल नहीं हुई तो अपने देश में हिंदी भाषा को आगे बढ़ाने का प्रयास रहेगा। उन्होंने बताया कि जापान के ओसाका यूनिवर्सिटी व टोकियो फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी में हिंदी की पढ़ाई हो रही है।
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सुजुकी चियाकी बताती हैं कि भारत और जापान का रिश्ता बहुत पुराना है और इसकी खास वजह सारनाथ है। वहीं से हमारा रिश्ता प्रगाढ़ हुआ है और अब जापान के प्रधानमंत्री के काशी आने से इस रिश्ते को और मजबूती मिलेगी। सुजुकी बताती हैं कि नरेंद्र मोदी जब प्रधानमंत्री नहीं थे, शिंजो अबे से उनकी मित्रता तब से ही थी। प्रधानमंत्री के बाद ये दोस्ती और गहरी हुई है और इसका सकारात्मक असर दोनों देशों पर आने वाले दिनों में दिखेगा।
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विकास और व्यापार दोनों ही क्षेत्र में भारत को फायदा होगा। जापान हर तरह से भारत का सहयोग करने को तैयार है। सुजुकी बताती हैं कि यहां लोगों में जापानी भाषा सीखने का बड़ा क्रेज है। इस वक्त करीब 100 स्टूडेंट्स जापानी भाषा की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल मेरी इच्छा यहीं पर जापानी भाषा को नया आयाम देने की है। अगर इसमें सफल नहीं हुई तो अपने देश में हिंदी भाषा को आगे बढ़ाने का प्रयास रहेगा। उन्होंने बताया कि जापान के ओसाका यूनिवर्सिटी व टोकियो फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी में हिंदी की पढ़ाई हो रही है।
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