Maha Shivratri: पहली बार व्यासजी के तहखाने में विग्रहों के होंगे दर्शन, 45 घंटे तक अनवरत जागेंगे बाबा विश्वनाथ
Maha Shivratri: पहली बार भगवान शिव और माता गौरा के विवाहोत्सव की साक्षी पूरी दुनिया होगी। मंदिर प्रशासन की ओर से गर्भगृह से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीमिंग के इंतजाम किए गए हैं। गुरुवार की शाम से ही श्रद्धालुओं ने बैरिकेडिंग में अपनी जगह लेनी शुरू कर दी।
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महाशिवरात्रि पर भगवान शिव अपने भक्तों को अनवरत 45 घंटे तक दर्शन देंगे। दुनिया भर के शिवभक्त पहली बार बाबा का 36 घंटे तक लाइव दर्शन करेंगे। शुक्रवार को मंगला आरती से शुरू होने वाला दर्शन-पूजन का सिलसिला शनिवार को शयन आरती के साथ विराम लेगा। तीन दशक बाद महाशिवरात्रि पर पहली बार श्रद्धालु व्यासजी के तहखाने में विग्रहों के भी दर्शन करेंगे।
पहली बार भगवान शिव और माता गौरा के विवाहोत्सव की साक्षी पूरी दुनिया होगी। मंदिर प्रशासन की ओर से गर्भगृह से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइव स्ट्रीमिंग के इंतजाम किए गए हैं। गुरुवार की शाम से ही श्रद्धालुओं ने बैरिकेडिंग में अपनी जगह लेनी शुरू कर दी। दशाश्वमेध घाट से गोदौलिया होते हुए बांसफाटक से गेट नंबर चार तक श्रद्धालुओं के लिए बैरिकेडिंग की गई है। वहीं गेट नंबर चार से चौक थाने के आगे तक बैरिकेडिंग लगाई गई है।
शुक्रवार की भोर में मंगला आरती के साथ ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन शुरू हो जाएंगे। मंदिर प्रशासन की ओर से 10 लाख श्रद्धालुओं के अनुसार मंदिर में इंतजाम किए गए हैं। बाबा के धाम में श्रद्धालुओं का स्वागत फूल बरसाकर किया जाएगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र ने बताया कि पहली बार 36 घंटे तक मंदिर के गर्भगृह से महाशिवरात्रि पर लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी। मंदिर के सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिये श्रद्धालु बाबा का दर्शन कर सकेंगे। पूरे मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है।
वृद्धों-दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर व ई-रिक्शा के इंतजाम
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लाइव दर्शन, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, खोया पाया केंद्र, पेयजल की व्यवस्था की गई है। दिव्यांग व वृद्धजनों के लिए व्हीलचेयर व ई-रिक्शा उपलब्ध रहेंगे।
शुक्रवार और शनिवार ऐसे होगा प्रवेश और निकास
- श्री काशी विश्वनाथ धाम में गेट नंबर चार से दर्शनार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। श्रद्धालु नीलकंठ भवन से कतारबद्ध होकर शंकराचार्य चौक में प्रवेश करेंगे। जांच के बाद मंदिर परिसर में प्रवेश सी द्वार से होगा। गर्भगृह के उत्तरी द्वार से झांकी दर्शन के बाद श्रद्धालु शंकराचार्य चौक होते हुए गंगा द्वार से बाहर निकलेंगे।
- नंदूफारिया रैंप से प्रवेश करने वाले श्रद्धालु यात्री सुविधा केंद्र एक की बैरिकेडिंग से होते हुए मंदिर प्रांगण में डी गेट से प्रवेश करेंगे। गर्भगृह के पश्चिमी द्वार से झांकी दर्शन के बाद दोबारा डी गेट से होते हुए शृंगार गौरी के रास्ते बाहर निकलेंगे।
- ढुंढिराज की तरफ से आने वाले दर्शनार्थी अन्नपूर्णा द्वार से प्रवेश करेंगे और चेकिंग के बाद डी गेट से मंदिर प्रांगण में पहुंचेंगे। गर्भगृह के पश्चिमी द्वार से झांकी दर्शन करने के बाद पुनरू डी गेट से होते हुए शृंगार गौरी के रास्ते बाहर निकलेंगे।
- सरस्वती द्वार से आने वाले श्रद्धालु यात्री सुविधा केंद्र दो के चेकिंग प्वाइंट से गुजरते हुए बी गेट से मंदिर प्रांगण में पहुंचेंगे। गर्भगृह के दक्षिणी द्वार से झांकी दर्शन करते हुए पुन: बी गेट से बाहर निकलेंगे।
- गंगा द्वार से प्रवेश करने वाले श्रद्धालु शंकराचार्य चौक होते हुए ए गेट से मंदिर परिसर में आएंगे। गर्भगृह के पूर्वी द्वार से झांकी दर्शन के बाद दोबारा ए गेट से बाहर निकलेंगे।
- प्रोटोकॉल के जरिये आने वाले श्रद्धालुओं को गेट नंबर चार से प्रवेश मिलेगा। शृंगार गौरी चेकिंग प्वाइंट से होकर नंदी के पास से मंदिर प्रांगण में प्रवेश करेंगे। सी गेट से दर्शन करने के बाद इसी रास्ते से वापस आएंगे।