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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   first time chant of Jai-Jai Bhagirath Nandini resounds at gates of Vishwanath Dham Lalita Ghat

UP: विश्वनाथ धाम के द्वार पर पहली बार 'जय-जय भगीरथ नंदिनी' का नाद, ललिता घाट भक्तों से फुल; सुरक्षा दुरुस्त

Fri, 20 Mar 2026 05:28 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Fri, 20 Mar 2026 05:28 AM IST
सार

Varanasi News: आदिशक्ति की प्रथम रात पर बाबा विश्वनाथ के दर पर सुरसरि की पहली आरती हुई। 100 से ज्यादा नावों-बजड़ों से भी भक्त पहुंचे। सात अर्चक, सात पंख फेरने वाले और सात डमरू वादकों ने आरती की। विश्वनाथ धाम की पहली गंगा आरती देख काशीवासियों ने चैत्र नवरात्र और हिंदू नववर्ष की अविरल शुरुआत की।

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first time chant of Jai-Jai Bhagirath Nandini resounds at gates of Vishwanath Dham Lalita Ghat
गायन प्रस्तुत करते पं. ऋत्विक सान्याल। - फोटो : संवाद

विस्तार

Varanasi News: विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार पर ‘जय-जय भगीरथ नंदिनी’ और ‘देवी सुरेश्वरी भगवती गंगे’ स्तोत्रम सुनने के लिए गंगा द्वार, ललिता घाट और जान्हवी किनारा श्रद्धालुओं से भर गया। इससे चैत्र नवरात्र और हिंदू नववर्ष की अविरल शुरुआत हुई। शाम 4 बजे से ही धाम में दर्शन कर लौटे श्रद्धालु ललिता घाट और गंगा द्वार की सीढ़ियों पर जगह घेरकर बैठने लगे। शाम 6:30 बजे तक 10–15 हजार भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा।

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विधायक नीलकंठ तिवारी, एमएलसी धर्मेंद्र सिंह, मंडलायुक्त एस. राजलिंगम, जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार सहित कई अधिकारी पहुंचे और मां गंगा की पूजा की। इसके बाद भक्तों ने करताल ध्वनि और ‘जय मां गंगा’ के जयघोष से वातावरण को गंगा मय कर दिया। शाम 6:45 बजे सात अर्चकों, सात डमरू वादकों और सात ब्राह्मणों के पंख फेरने के साथ गंगा आरती शुरू हुई। इस दौरान ललिता घाट और गंगा द्वार पर बैठे भक्त झूमते हुए पूरे 45 मिनट तक तालियां बजाते रहे। 
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न केवल घाट पर बैठे श्रद्धालु, बल्कि गंगा दर्शन कर नमो घाट से लौट रहे भक्त भी 100 से ज्यादा नावों, बजड़ों और क्रूज से आरती का नजारा देख रहे थे। हालांकि, भक्तों को पहली बार गंगा में कुल छह बड़ी गंगा आरतियां देखने को मिलीं। वहीं, कई बजड़े तो गंगा आरती समाप्त होने के बाद ही दशाश्वमेध की ओर बढ़े।

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त्रिपुर सुंदरी तंत्र और शक्ति की सर्वोच्च देवी का स्थान
गंगा आरती के दौरान प्रदेश के स्टांप शुल्क मंत्री रविंद्र जायसवाल और विधायक अवधेश सिंह भी पहुंचे। विश्वनाथ मंदिर के सीईओ विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि गंगा प्रवेश द्वार ललिता घाट पर मां दुर्गा के पंचम स्वरूप त्रिपुर सुंदरी की आराधना का विशेष महत्व है, जिन्हें तंत्र और शक्ति की सर्वोच्च देवी माना जाता है। ऐसे पावन स्थल पर मां गंगा की आरती का आयोजन इस उत्सव को और भी विशेष बनाता है। साथ ही चैत्र नवरात्र और नव संवत्सर के योग ने गंगा आरती को और भी खास बना दिया।

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