कब सीखेंगे सबक: वाराणसी के बहुमंजिला इमारतों में कागजों पर ही अग्नि सुरक्षा, बिल्डिंग एक्ट की अनदेखी पड़ सकती है भारी
वाराणसी के सिगरा स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के सामने 11 मंजिला अन्नपूर्णा ग्रैंडयोर अपार्टमेंट में देर रात लगी आग ने अग्नि सुरक्षा संसाधनों की कलई खोल कर रख दी है।
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वाराणसी के सिगरा स्थित अन्नपूर्णा ग्रैंडयोर अपार्टमेमट में लगी बीती रात लग आग ने बहुमंजिला इमारतों में लगने वाले अग्नि सुरक्षा संसाधनों की हकीकत सामने रख दी। बिल्डिंग एक्ट की सबसे अहम कड़ी अग्नि सुरक्षा की अनदेखी इस कदर थी कि अन्नपूर्णा ग्रैंडयोर में आग के बाद वहां लगे संसाधन पूरी तरह फेल रहे। अगर यहां अग्नि सुरक्षा के संसाधन ठीक होते तो शायद यह घटना इतना विकराल रूप नहीं ले पाती।
उधर, इस लापरवाही ने अग्निशमन दल की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा किए। कारण, हर साल रिन्यूअल के नाम पर कागजी खानापूर्ति के चलते ही एक भी पाइप से आग बुझाने के लिए पानी नहीं निकल पाया। दरअसल, अन्नपूर्णा ग्रैंडयोर सहित ज्यादातर बहुमंजिली इमारतों में बनाई गई अग्नि सुरक्षा महज दिखावा है।
अग्नि सुरक्षा को लेकर चिंता की लकीरें
न तो इसका प्रशिक्षण ही लोगों को दिया जाता है और न ही वहां रहने वाले इस बड़े खतरे को लेकर संजीदा रहते हैं। वाराणसी में गुरुवार रात की घटना ने शहर में बने गगनचुंबी इमारतों की अग्नि सुरक्षा को लेकर चिंता की लकीरें खींच दी है। बहुमंजिला इमारतों में नक्शा पास कराने के लिए अग्नि सुरक्षा मानक सबसे अहम होता है। इसके बाद हर साल अग्निशमन दल की जिम्मेदारी होती है कि वह संसाधनों की जांच कर एनओसी देने दें।
डीएम बोले- संसाधन और संयंत्रों की जांच होगी
भवन निर्माण के समय बिल्डर ज्यादातर काम कागजी करते हैं और विभागीय मिलीभगत से अपने संसाधनों की एनओसी भी ले लेते हैं। काशी विद्यापीठ के सामने की इमारत में लगी आग के बाद सामने आई अग्नि सुरक्षा की लापरवाही प्रशासन के लिए भी बड़ा सबक है।
जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा कि बहुमंजिला इमारतों में अग्नि सुरक्षा संयंत्र आवश्यक है और उससे ज्यादा अहम उसमें लगे संसाधनों की जांच होनी चाहिए। अग्निशमन विभाग को निर्देश दिया जाएगा कि इमारतों में लगे संसाधन और संयंत्रों की जांच के लिए अभियान चलाएं। अन्नपूर्णा ग्रैंडयोर मामले की भी जांच कराई जाएगी।
मॉक ड्रिल के अभाव में जंग खा रहे संसाधन
अन्नपूर्णा ग्रैंडयोर की तरह ही शहर में बनी सैकड़ों बहुमंजिला इमारतों में अग्निशमन दल की ओर से कभी मॉक ड्रिल भी नहीं कराई जाती है। यही कारण है कि न तो समय पर संसाधनों की जांच हो पाती है और न ही जंग खाए संसाधन को बदलने का प्रयास होता है। जबकि बहुमंजिला इमारतों में आग लगने के खतरे सबसे ज्यादा होते हैं और बाहरी संसाधनों से उस पर काबू पाना भी मुश्किल होता है।
चार सदस्यीय कमेटी करेगी आग लगने की घटना की जांच
11 मंजिला बिल्डिंग का निर्माण बिल्डर उमा ढंढानिया, आरती जैन ने कराया था। 44 फ्लैट की इस बिल्डिंग में चौथे फ्लोर के एक फ्लैट में आग लगी थी। टीम को शुक्रवार को मौके पर जाकर निरीक्षण करने का निर्देश भी दिया गया है।