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Varanasi News: बीएचयू में हिंदू अध्ययन से पीएचडी को अंतिम मंजूरी, अगले सत्र से 14 सीटों पर दाखिले

Sat, 28 Dec 2024 01:24 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 28 Dec 2024 01:24 AM IST
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Final approval for PhD in Hindu Studies in BHU, admission on 14 seats from next session
16 क्रेडिट और 500 अंकों का होगा एक साल का कोर्स वर्क
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नंबर गेम :
21 यूनिट की चलेंगी क्लासेज

माई सिटी रिपाेर्टर
वाराणसी। बीएचयू में हिंदू अध्ययन से पीएचडी का रास्ता साफ हो गया है। बृहस्पतिवार को एकेडमिक काउंसिल की बैठक में कोर्स की भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक ने डिटेल प्रस्तुति दी। इसके बाद प्रस्ताव को लागू करने पर काउंसिल ने अंतिम मुहर लगा दी। अगले सत्र से एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। फिलहाल इस बार की पीएचडी बुलेटिन तैयार हो चुकी है, इसलिए इस बार प्रवेश नहीं होगा। पीएचडी कोर्स वर्क दो सेमेस्टर का होगा। 20 सितंबर को कला संकाय की ओर से एडहॉक बोर्ड ऑफ स्टडीज ने फैसला लिया था। अभी तक बीएचयू में भारत अध्ययन केंद्र की ओर से पीजी कोर्स चलाया जा रहा था। पहली बार अब हिंदू अध्ययन में शोध भी कराया जाएगा। पहले सत्र में 14 शोधार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। हिंदू अध्ययन से जुड़े विषयों आचार्य, संस्कृत और वेद में नेट-जेआरएफ क्वालिफाइड अभ्यर्थियों को पीएचडी में प्रवेश दिया जाएगा। पीएचडी के कोर्स वर्क का सिलेबस एकेडमिक काउंसिल की बैठक में प्रस्तुत किया गया था। एक साल की पढ़ाई के बाद छात्र टॉपिक लेकर गहन रिसर्च करेंगे। 21 यूनिट की क्लासेज चलेंगी। पूरा कोर्स वर्क 16 क्रेडिट और 500 अंकों का होगा। भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन और संस्कृति, योग-मनोविज्ञान और कला-स्थापत्य और विज्ञान को 3-3 क्रेडिट और शोध प्रविधि, लघु शोध प्रबंध के लिए 2-2 क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं।
धर्म के साथ विज्ञान का भी होगा प्रभाव
भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. सदाशिव कुमार द्विवेदी ने बताया कि भारतीय धर्म शास्त्रों पर दुनिया भर में खूब रिसर्च हो रहा है। भारत में एकेडमिक तौर पर रिसर्च काफी करना होगा। इसी को देख हिंदी धर्म और शास्त्रीय परंपराओं पर गहन शोध किया जाएगा। इस पीएचडी में शास्त्र और विज्ञान दोनों का ही प्रभाव होगा।
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एक साल तक होगी इन विषयों की पढ़ाई
शास्त्रीय साहित्य, पुरुषार्थ, संस्कार, वैष्णव, शैव, शाक्त, भारतीय विधि शास्त्र, अद्वैत दर्शन और उसके संप्रदाय, बौद्ध और जैन दर्शन, शील, समाधि, प्रज्ञा, पंच महाव्रत, लोक परंपरा और भारतीय दर्शन से इसका सामंजस्य, भारतीय स्थापत्य, भूगोल, खगोल, आयुर्वेद, गणित, योग।
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