फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   film life of an outcast funding campaign complete

‘लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट’ में शोषण और संघर्ष का सच बुनता फ़िल्मकार

Wed, 05 Jul 2017 03:28 PM IST
amarujala.com, wriiten by अनुपम निशान्त
amarujala.com, wriiten by अनुपम निशान्त Updated Wed, 05 Jul 2017 03:28 PM IST
विज्ञापन
film life of an outcast funding campaign complete
‘लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट’ - फोटो : self
‘स्कूल को गणित के टीचर की जरूरत नहीं। जाति का सवाल गणित के सवालों से ज्यादा कठिन है...।’ यह महज एक संवाद है फिल्म ‘लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट’ का। दलितों के शोषण और संघर्ष पर आधारित 90 मिनट की इस फिल्म के लेखक-निर्देशक हैं पवन के. श्रीवास्तव।
विज्ञापन


ये वही पवन हैं, जिनकी पहली फिल्म ‘नया पता’ 2014 में देश के 16 शहरों के मल्टीप्लेक्स में पीवीआर ने एक साथ रिलीज की थी। इस फिल्म की पहली स्क्रीनिंग बनारस में हुई थी। हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय ने फिल्म को अपनी लाइब्रेरी में संग्रहीत किया।
विज्ञापन


 किसी भी नौजवान के लिए यह सफलता खुशी का सबब हो सकती थी पर पवन इससे संतुष्ट नहीं हुए। बकौल पवन, ‘मैंने शुरू से देखा कि गांव का वास्तविक जीवन हमारी फिल्मों से गायब है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जीवन के तमाम पहलुओं में से पलायन और विस्थापन का दर्द उकेरती फिल्म मैंने जिन दर्शकों के लिए बनाई, वे ही उससे वंचित रह गए। इसीलिए अपनी दूसरी फिल्म ‘लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट’ को देश के 500 गांवों में हम प्रदर्शित करेंगे।

इसमें मुख्य भूमिका निभा रहे हैं ‘पान सिंह तोमर’ व ‘फिल्मिस्तान’ फिल्म में अपने अभिनय का हुनर दिखा चुके रवि भूषण भारतीय। इस फिल्म की शूटिंग के बाद पोस्ट प्रोडक्शन के लिए पवन ने ‘क्राउड फंडिग’ का तरीका अपनाया। इसके लिए फेसबुक और ट्विटर पर कैंपेन चला और 50 दिन में चार लाख रुपये जुटाने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया।

 मूल रूप से छपरा के रहने वाले 35 वर्षीय पवन ने इलाहाबाद से इंटरमीडिएट और दिल्ली से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की। फिल्मों के प्रति रुझान बचपन से था पर पारिवारिक पृष्ठभूमि एक सामान्य मध्यवर्गीय थी। फिर भी पवन के भीतर का कलाकार आखिर चुप कब तक रहता।

मुंबई जाकर उन्होंने चार साल तक नौकरी की। फिल्म निर्माण क्षेत्र में आने के लिए नौकरी छोड़ दी। दो साल तक उन्होंने फिल्म निर्माण की तकनीक सीखी।

एक को-प्रोड्यूसर इलाहाबाद के, चार प्रोड्यूसर काशी के

film life of an outcast funding campaign complete
मुहम्मद आसिफ, पवन के. श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला
पवन कहते हैं कि आम आदमी का सिनेमा आम आदमी के द्वारा ही बनाया जाना चाहिए। साथ ही, कम संसाधनों में भी बेहतर काम कैसे किया जा सकता है, यह बात भी युवाओं को समझनी चाहिए। इसी सोच के साथ लोगों से सहयोग मांगा।

‘लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट’ के चार प्रोड्यूसर्स में से एक इलाहाबाद के मुहम्मद आसिफ हैं। 152 प्रोड्यूसर्स में काशी के जितेंद्र गिरि, सुमित सिंह, हिमांशु सिंह और सत्यम वर्मा भी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed