वाराणसी : गंगा-वरुणा के प्रबाह ने डराया, घरों में पानी घुसने से 15 गांव के पांच सौ परिवार हुए बेघर
बाढ़ राहत के लिए प्रशासन ने 28 चौकियां स्थापित की हैं। नावों का संचालन भी रोक दिया है। एनडीआरएफ को भी अलर्ट कर दिया गया है। उधर, करसड़ा स्थित नगर निगम कचरा प्लांट और उस तक पहुंचने वाला मार्ग गंगा के पानी के कारण मंगलवार को बंद हो गया। इससे दिनभर नगर निगम का कचरा नहीं फेंका जा सका।
नगर निगम के कर्मचारी जगह-जगह गड्ढे खोदकर कचरा डंप करने के बाद उसे पाटने में जुटे रहे। इससे शहर की सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हो गई है। उधर, रमना में निर्माणाधीन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट तक पानी पहुंच गया है।
खतरे के निशान की ओर बढ़ीं गंगा, बनाई गईं बाढ़ चौकियां :
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार शाम पांच बजे गंगा का जलस्तर 69.87 मीटर दर्ज किया गया जो चेतावनी बिंदु 70.26 से महज आधा मीटर नीचे है। वहीं गंगा के बढ़ने की गति दो सेमी प्रति घंटा है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से नक्खी घाट क्षेत्र में बाढ़ चौकी बनाई गई है। यहां तीन लेखपालों की ड्यूटी लगाई गई है। बाढ़ में फंसे लोगों को लाने और ले जाने के साथ उनके सामान की सुरक्षा के लिए वरुणा नदी में चार नाव चलाई जा रही हैं।
मीर घाट :
मंगलवार दोपहर एक बजे अमर उजाला की टीम नक्खी घाट क्षेत्र के मीर घाट क्षेत्र में पहुंची। यहां के तालीम नगर निवासी वसीम, आलम, अमीन, हुस्न बानो, मोहन मिस्त्री समेत कई लोग अपना सामान समेट कर जा चुके थे। आसपास के लोगों ने बताया कि बाढ़ का पानी सबसे पहले इन लोगों के घरों में पहुंचा था, इसलिए ये लोग मंगलवार सुबह घर छोड़कर रिश्तेदारों और किराए के मकान में जा चुके हैं। जो लोग मिले वह भी सामान पैक कर चुके थे।
दनियालपुर :
बाढ़ का पानी लगातार बढ़ने के कारण दीनदयालपुर निवासी पप्पू चौधरी, सोनू चौरसिया, राजेंद्र प्रसाद चौधरी, मुन्नी देवी, शिव कुमार, मुनीब, गुड़िया, लल्लन विश्वकर्मा, भोला, महेंद्र कुमार और तारा देवी समेत कई लोग मकान खाली कर झोपड़ी डालकर रहे रहे हैं। उन्होंने बताया कि वरुणा का पानी एक मंजिला घर में भर चुका है। व्यवस्था न होने के चलते खुले आसमान के नीचे तीन दिन से रह रहे हैं।
सारनाथ क्षेत्र में भी वरुणा का असर :
पुरानापुल, सलारपुर, पुलकोहना क्षेत्रों में वरुणा नदी का पानी घरों में घुस गया है। यहां के लोग सामान समेट कर किराए के मकानों में शिफ्ट हो गए हैं। सलारपुर क्षेत्र के छेदीलाल, चमन, पिंटू, राजनाथ, मिंटू, नारायण, छोटेलाल, राजू यादव समेत लगभग 25 परिवार अपना घर छोड़कर किराए के मकान में रह रहे हैं। कई लोग घर से सामान भी नहीं निकाल पाए हैं।
सामने घाट क्षेत्र में भी पहुंचा गंगा का पानी :
सामने घाट से लेकर अस्सी घाट रमना तारापुर टिकरी तक बाढ़ का पानी भर गया है। नाले से होते हुए पानी मारुति नगर कॉलोनी में घुस गया है। सामने घाट स्थित साईं मंदिर और बाढ़ राहत पीएससी कैंप के पास पानी के बहाव से मिट्टी कटने लगी है। यहां के लोग घर छोड़ने की तैयारी में है। सामने घाट के अधिवक्ता राकेश तिवारी, अनुज तिवारी, विक्की मिश्रा, रमाशंकर पटेल, आदित्य सिंह, राजू यादव, पवन साहनी ने बताया कि बाढ़ का पानी अब पटेल नगर के पिछले हिस्से में भी घुसने लगा है और रत्नाकर विहार व हरिओम नगर में बुधवार तक पहुंचने लगेगा। असि नदी का पानी रोहित नगर, कैवल्य धाम, साकेत नगर के निचले हिस्सों में भर गया है।
शवदाह के लिए चार घंटे तक करना पड़ा इंतजार :
गंगा का जलस्तर बढ़ने से शवदाह के लिए तीन से चार घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं बारिश के चलते लकड़ी भी महंगी हो गई है। मणिकर्णिका घाट के दुकानदार विभूति नारायण सिंह ने बताया कि नीचे का प्लेटफार्म पूरा डूब चुका हैं। पहले एक साथ 12 से 20 शवों का अंतिम संस्कार होता था, लेकिन अब छतों पर 6 से 7 शवदाह ही हो रहे हैं। इससे गलियों में लंबी लाइन लग रही है। शवदाह के सामान की कीमतों में वृद्धि हो गई है। पहले लकड़ी 300 रुपये प्रति कुंटल बिक रही थी, अब यह 500 रुपये में हो गई है।
मंत्री, डीएम और एसएसपी ने बाढ़ग्रस्त इलाकों का लिया जायजा :
राज्यमंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने मंगलवार को बाढ़ग्रस्त क्षेत्र कोनिया सहित कई क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने डीएम से प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में विस्थापित करने और राहत पहुंचाने को कहा है। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को किसी प्रकार की समस्या नहीं आने दी जाएगी। राहत सामग्री का भी वितरण कराया जाएगा। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उधर, डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने भी घाटों और बाढ़ ग्रस्त इलाकों का जायजा लिया और सभी से अलर्ट रहने को कहा।
रिहायशी इलाके की तरफ बढ़ने लगा बाढ़ का पानी :
चौबेपुर के ढाब इलाके में गंगा का पानी रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ने लगा है। इससे ढाब क्षेत्र में चालीस हजार की आबादी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। यहां हैंडपंप का पानी दूषित हो गया है। स्वास्थ्य विभाग व राजस्व विभाग की ओर से यहां अभी कोई इंतजाम नहीं किया गया है। वहीं रामपुर, गोबरहा व रामचंदीपुर गांव के सामने कटान से लोग दहशत में हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी का सामना रेतापार के लोगों को करना पड़ रहा है। क्योंकि यहां के ज्यादातर लोग सब्जियों की खेती कर रहे हैं। फसल डूबने से मुसीबत आ गई है। रेतापार के सुरज निषाद ने पांच बीघा किसानों की जमीन लेकर सब्जी की खेती थी। यह बाढ़ के पानी में डूब चुकी हैं। रामचंदीपुर के किसान बद्री नारायण यादव की फसल डूब चुकी है। रामचंदीपुर के सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार यादव ने बताया कि दूषित पानी पीने व मच्छरों के काटने से लोग बीमार पड़ रहे हैं। परंतु स्वास्थ्य विभाग बेखबर है। पशुओं को बाढ़ जनित रोगों से बचाने के लिए टीका नहीं लगाया गया है। गोबरहा के किसान कालीचरण की भूमि कटान से पानी में समा रही है।
प्रभावित क्षेत्रों में 27 बाढ़ राहत चौकी बनाई गई :
सदर तहसील में गंगा नदी से प्रभावित क्षेत्रों में 27 बाढ़ राहत चौकी बनाई गई है। बाढ़ चौकियों पर राजस्व विभाग के कर्मियों के साथ साथ अन्य विभागों के लोग भी तैनात हैं। उपजिलाधिकारी सदर महेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि सदर तहसील में सरायमोहाना, मुस्तफाबाद, मोकलपुर, गोबरहां, रमचंदीपुर, भगतुआं और बर्थराकला सहित कुल 27 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। पीएचसी प्रभारी चिरईगांव डॉ. अमित कुमार सिंह ने बताया कि विकास खंड की सातों बाढ़ चौकियों पर चिकित्सक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता की तैनाती की गई है।
कूड़ा डंपिंग के रास्ते पर लगा पानी, नहीं जा पा रहीं गाड़ियां :
रोहनिया क्षेत्र में कूड़ा डंपिंग स्थल करसड़ा में जाने वाले रास्ते पर बाढ़ का पानी भर जाने से कूड़ा लेकर जाने वाली गाडि़यां कूड़ा लेकर डंपिंग स्थल तक नहीं जा पा रही हैं। इससे शहर से कूड़ा उठने में दिक्कत आएगी। राजातालाब तहसीलदार प्रमोद कुमार पांडेय, लेखपाल बबलू श्रीवास्तव ने बताया कि करसड़ा , छितौनी, परसुपुर , शाहंशाहपुर में बाढ़ चौकी स्थापित की गई है।