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बढ़ा खतराः बनारस में चेतावनी बिंदु के पार पहुंचीं गंगा, वरुणा में पलट प्रवाह से खलबली, निचले इलाके में शुरू हो गया पलायन

Sat, 07 Aug 2021 11:53 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 07 Aug 2021 11:53 AM IST
सार

गंगा के जलस्तर में तीन  सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोत्तरी हो रही है। इधर, गंगा का जलस्तर बढ़ने से वरुणा में पलट प्रवाह हो गया है। इससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों ने अब पलायन शुरू कर दिया है। 

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fear of flood Ganga water level crossed warning point and about to touch  danger mark in varanasi turmoil due to reverse flow in Varuna river migration started in low lying area
अस्सी घाट नजारा, वरुणा पार इलाके से पलायन करते लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पहाड़ों पर हो रही बरसात से गंगा में उफान बना हुआ है। बनारस में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु पार कर गया है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार शनिवार सुबह 10 बजे गंगा का जलस्तर 70.42 मीटर पहुंच गया जो खतरे के निशान से महज 84 सेंटीमीटर नीचे है। इधर, पूर्वांचल के बलिया जिले में  गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है। वहीं गाजीपुर, जौनपुर और मिर्जापुर जिले में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन महकमा अलर्ट मोड में आ गया है। 

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बनारस में गंगा के जलस्तर में तीन  सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से बढ़ोत्तरी हो रही है। इधर, गंगा का जलस्तर बढ़ने से वरुणा में पलट प्रवाह हो गया है। इससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों ने अब पलायन शुरू कर दिया है। शुक्रवार सुबह से ही वरुणा पार इलाके में गंगा के पलट प्रवाह के कारण खलबली मची थी। पुलकोहना से नक्खीघाट के बीच दर्जनों की संख्या में मकान पानी से घिर गए हैं। खतरे को देखते हुए पलायन जारी है। बीते 48 घंटों में गंगा में करीब तीन मीटर का बढ़ाव दर्ज किया गया।
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बाढ़ बुलेटिन के अनुसार शुक्रवार की सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 69.30 मीटर था, जो दोपहर दो बजे 69.66 मीटर पहुंच गया था।  गंगा का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर है। प्रयागराज में बढ़ाव जारी होने के कारण बनारस में जलस्तर में और बढ़ाव की आशंका बनी हुई है। 

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बाढ़ के पानी से घिर गए हैं मकान, बढ़ी धुकधुकी

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गंगा के तटवर्ती इलाकों में लोग दहशत में - फोटो : अमर उजाला

गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के कारण असि और वरुणा में पलट प्रवाह की स्थिति है। गंगा के तटवर्ती इलाकों में लोग दहशत में हैं। पानी से घिर चुके इन मकानों में रहने वालों ने ऊंची बस्तियों में किराए पर कमरा लेकर अपना सामान वहां पहुंचाना शुरू कर दिया है।

शक्कर तालाब के चंद्रशेखर ने बताया कि उनके घर में पानी घुस गया है और वह अब ऊंची जगह पर किराए पर कमरा लेकर रहेंगे। नक्खीघाट की शारदा ने बताया कि बीती रात ही उनके मकान के निचले हिस्से में पानी घुस गया। पहला तल्ला पूरी तरह से पानी में डूब चुका है। अब पूरा परिवार दूसरे तल पर रह रहा है। 


वरुणा किनारे बसी बस्तियां कोनिया, दीनदयालपुर, नक्खीघाट, पुलकोहना में दो सौ से अधिक मकान पानी से घिर चुके हैं। शुक्रवार की सुबह से लोगों अपने जरूरी सामानों के साथ पलायन कर रहे थे। तिनपुलवा के नीचे से होते हुए वरुणा में गिरने वाले नाले के दोनों ओर बने अधिकतर मकानों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। मुन्नी, अरशद, वकील, इरफान, मो. मुश्ताक, असलम, प्रमोद, अनिल, कमलेश, असलम दर्जी, रमजान, इरफान, बाबू ने अपना घर छोड़कर दूसरी जगह शरण ली है। 

छत से लेकर गलियों तक हो रहा शवदाह

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छत से लेकर गलियों तक हो रहा शवदाह - फोटो : अमर उजाला

गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह के लिए मुसीबतें भी बढ़ गई हैं। मणिकर्णिका घाट पर जहां छत पर शवदाह हो रहा है, वहीं हरिश्चंद्र घाट के ऊपर गलियों में शवदाह शुरू हो चुका है। गंगा की सभी घाटों का संपर्क पूरी तरह से समाप्त हो गया है। ऐसे में हरिश्चंद्र और मणिकर्णिका दोनों ही घाटों पर लोगों को शवदाह करने के लिए प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। 

गंगा के बढ़ते जलस्तर से सामने घाट इलाके में रहने वाले लोगों को भी अब डर सताने लगा है। जलस्तर में अगर चार से पांच फुट की और बढ़ोत्तरी हुई तो क्षेत्र की मारुति नगर कॉलोनी और गायत्री नगर कॉलोनी के डेढ़ सौ से अधिक मकानों तक बाढ़ का पानी पहुंच जाएगा। कॉलोनियों में रहने वालों की मुश्किलें भी बढ़ जाएंगी। जलस्तर बढ़ने से नगवा नाले का पानी भी उल्टा बहने लगा है। कुछ कालोनियाें में सीवर ओवरफ्लो करने लगा है। 

2013 में अचानक घुस गया था बाढ़ का पानी

वरुणा किनारे की बस्तियों में रहने वालों को अब बाढ़ का खतरा सताने लगा है। उनका कहना है कि 2013 में आधी रात में बाढ़ का पानी अचानक उनके घरों में घुस गया था। अचानक पानी घुसने से घर-गृहस्थी का सामान बर्बाद हो गया था। बस्तियों में रहने वालों को पता ही नहीं है कि क्षेत्र में कहीं बाढ़ राहत चौकी उनके लिए बनाई गई है या नहीं। 

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