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जानें क्या है काला सोना: वाराणसी में पहली बार 50 किसान करेंगे इसकी खेती, 10 हेक्टेयर के जलाशय तैयार

Sun, 08 Jun 2025 04:34 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 08 Jun 2025 04:34 PM IST
सार

वाराणसी के किसान अब मखाना की खेती करेंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में 50 अन्नदाताओं को जोड़ा जाएगा। जिले में पहली बार बड़े पैमाने पर मखाना की खेती होगी। किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

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Farmers of varanasi will cultivate black gold seeds will come from Darbhanga farmers join project
वाराणसी के किसान करेंगे मखाना की खेती। - फोटो : istock

विस्तार

धार्मिक नगरी काशी अब अपनी नई पहचान बनाने जा रही है, और यह पहचान होगी मखाना उत्पादन से। जिले के करीब 50 किसान 10 हेक्टेयर के जलाशयों में मखाने की खेती करेंगे। जिसे काला सोना के नाम से भी जाना जाता है। पहली बार, जिले में बड़े पैमाने पर 10 हेक्टेयर भूमि पर मखाना की खेती करने की तैयारी चल रही है। 

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इस महत्वाकांक्षी परियोजना में लगभग 50 किसानों को शामिल किया जाएगा, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त होने का एक नया अवसर मिलेगा। इस पहल के लिए उन्नत किस्म के बीज बिहार के दरभंगा से लाए जाएंगे, जो मखाना उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। 
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जिला उद्यान अधिकारी सुभाष कुमार ने बताया कि पहले चरण में प्रायोगिक तौर पर मखाने की खेती के लिए किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। किसानों को आधुनिक तकनीकों से अवगत कराया जाए और उन्हें गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए प्रशिक्षित किया जाए। परियोजना में शामिल होने वाले किसानों को उन्नत बीज के साथ-साथ तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। 

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किसानों को बताई सब्जी उत्पादन की तकनीक
सब्जियों की खेती की शनिवार को पिंडरा और सेवापुरी ब्लॉक के 650 से अधिक किसानों को जानकारी दी गई। भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों को भिंडी की खेती, व्यावसायिक सब्जी उत्पादन और बेमौसम सब्जियों को उगाने के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में जानकारी दी।

नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे आधुनिक उर्वरकों का भी प्रदर्शन किया गया। ड्रोन तकनीक से कीटनाशक छिड़काव और सेंसर आधारित सिंचाई प्रणाली के बारे में बताया गया। 

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