फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Famous Ramlila of Ramnagar 4

कहत सप्रेम नाइ महि माथा...

Wed, 28 Sep 2016 01:33 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी Updated Wed, 28 Sep 2016 01:33 AM IST
विज्ञापन
Famous Ramlila of Ramnagar 4
रामनगर की विश्वप्रसिद्ध रामलीला
भावों से भरे लीला प्रेमियों की भीड़ मंगलवार को सगरा पोखरे के पास छेदू पहलवान के अखाड़े (भारद्वाज मुनि के आश्रम) से रामबाग पोखरे के पास बने चित्रकूट तक घूमती रही। आधा किलोमीटर का यह पथ शाही सवारी के साथ ही लीला प्रेमियों के आकर्षण से गुलजार रहा। इस दौरान कहीं मशालची मशाल जलाकर रोशनी करते नजर आए तो कहीं पंचलाइट जलाने के लिए जतन किए जाते रहे। रात 9:30 बजे चित्रकूट में मेहताबी रोशनी में आरती हुई तो लोग हर हर महादेव के गगनभेदी जयकारे के साथ धन्य हो उठे।
विज्ञापन


नगर लोग सब सजि सजि जाना/ चित्रकूट कहं कीन्ह पयाना/ सिबिका सुभग न जाहिं बखानी/ चढ़ि चढ़ि चलत भईं सब रानी/ राम दरस बस सब नर नारी/ जनु करि करनि चले तकि बारी/ देखि सनेहु लोग अनुरागे/ उतरि चले हय गय रथ त्यागे/ सई तीर बसि चले बिहाने/ सृंगबेरपुर सब नियराने/ कहत सप्रेम नाइ महि माथा/ भरत प्रनाम करत रघुनाथा/ उठे रामु सुनि पेम अधीरा/ कहुंपट कहुं निषंग धनु तीरा...।  गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से अयोध्यावासियों के साथ रथों को सजाकर भरत-शत्रुघ्न भगवान राम को मनाने के लिए निकल पड़े हैं। किले से शाम पांच बजे बग्घी पर काशिराज की शाही सवारी निकली। राजा के छेदू पहलवान के अखाड़े के पास पहुंचकर हाथी पर सवार होने के बाद भारद्वाज मुनि के आश्रम में प्रात:काल भरत जी के स्नान से लीला शुरू हुई।
विज्ञापन


तीर्थराज प्रयाग को प्रणाम कर भरत चित्रकूट की ओर प्रस्थान करते हैं। उधर, भगवान राम का भी मन भ्राता भरत का स्मरण कर अधीर हो उठता है। तभी इंद्रदेव देवताओं से कहते हैं कि ऐसा उपाय करो कि भरत का मिलन राम से न होने पाए। यह सुनकर गुरु बृहस्पति उन्हें समझाते हैं कि सारा जग भगवान श्रीराम को जपता है। भगवान श्रीराम के प्रति भरत की अगाध भक्ति है। जो छल करेगा, वह राम की क्रोधाग्नि में जलकर भस्म हो जाएगा। तब तक भरत यमुना तट पर पहुंचते हैं। राम के समान श्यामवर्ण जल को देख उनका स्नेह छलक उठता है। निषादराज नाव लेकर आते हैं और सभी को लेकर नदी पार कराते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


राम का पता बताने वालों को भरत अत्यंत प्रेम करते हैं। रास्ते में शकुन दिखाई देता है। भरत कहते हैं कि लगता है-अब भगवान राम के दर्शन होंगे। उधर, श्रीराम स्नान कर शंकर जी का पूजन करते हैं और तभी उत्तर दिशा में आकाश में धूल उड़ती दिखाई देती है। पशु-पक्षी भागने लगते हैं। कोल-भील राम से कहते हैं कि-स्वामी आपके दोनों भाई आ रहे हैं। सीता यह सुनकर सोच में पड़ जाती हैं कि भरत क्यों आ रहे हैं।


भरत आश्रम के नजदीक पहुंचते हैं। कामदगिरि के निकट भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के ठहरे होने की जानकारी मिलती है। भरत पेड़ों की आड़ में हैं। राम उन्हें देख नहीं पाते। भरत करीब पहुंचने पर राम के चरणों में गिर जाते हैं। भगवान उन्हें गले से लगा लेते हैं और उनकी आंखों से प्रेममय आंसुओं की धार बहने लगती है। भगवान का मिलन देख देवलोक में जय जयकार होने लगती है। इसके बाद राम सबको लेकर आश्रम जाते हैं और हर ओर खुशी छा जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed