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बीएसएफ के सहायक कमांडेंट का शव घर पहुंचा, परिजनों ने इस मांग पर अंतिम संस्कार करने से किया मना

Sat, 22 Feb 2020 03:17 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 22 Feb 2020 03:17 PM IST
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family stopped funeral to demand martyr status of Assistant Commandant of BSF in jaunpur
घर पहुंचा शव। - फोटो : अमर उजाला।

जौनपुर जिले के मछलीशहर में बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट विजय बहादुर यादव का शव शनिवार की सुबह पैतृक गांव गोहका पहुंचा। परिजनों ने शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया है। उनका कहना था कि जब तक शहीद का दर्जा नहीं मिलता, वह अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।

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सूचना पाकर मछलीशहर सांसद बीपी सरोज, राज्य मंत्री गिरीश चंद यादव, डीएम दिनेश कुमार सिंह, एसपी अशोक कुमार मौके पर पहुंचे। बातचीत कर परिजनों को मनाने की कोशिश में लगे रहे, लेकिन दोपहर तक सहमति नहीं बनी थी।
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शनिवार सुबह साढ़े आठ बजे जब बीएसएफ अधिकारी विजय बहादुर का शव उनके पैतृक गांव गोहका पहुंचा तो वहां भारी भीड़ जमा थी। शव के पहुंचते ही कोहराम मच गया। शव पहुंचने के आधे घंटे बाद जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार, मंत्री गिरीश चंद्र यादव, सांसद बी पी सरोज मृत जवान के घर पहुंच गए। उनके पहुंचने पर मृत बीएसएफ अधिकारी का बेटा विनोद कुमार, विकास व भाई हंसराज यादव सहित अन्य उपस्थित ग्रामीण मृतक जो शहीद का दर्जा मिलने के बाद ही दाह संस्कार करने की बात कही।

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मांग उठने के बाद जिलाधिकारी ने शव के साथ जम्मू से आए बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट मोहित कुमार से वार्ता की। मोहित कुमार ने बताया कि मामले में जम्मू में लोकल पुलिस व बीएसएफ ने अलग-अलग मुकदमा दर्ज किया है। अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण स्पष्ट होगा। उनकी मौत से संधिधित सभी आंकड़े जुटाए जा रहे हैं, जैसे ही रिपोर्ट एकत्रित होने के बाद जांच पूरी होगी तो उन्हें शहीद का दर्जा देने पर विचार होगा।

हालांकि परिजन और मौके पर उपस्थित ग्रामीण उन्हें शहीद का दर्जा मिलने के बाद ही अंत्योष्टि करने के मांग पर अड़े हुए हैं। परिजनों की मांग के आगे प्रशासन भी बेबस नजर आ रहा है। जम्मू से आए अधिकारी मोहित कुमार ने मृत जवान के परिजनों की संतुष्टि के लिए दो बार बीएसएफ के आईजी से बात भी कराई। फोन पर उन्होंने मृत जवान के पुत्र विनोद से बात भी कराई, मगर शव पहुंचने के चार घंटे बीत जाने के बाद पंचायत जारी है। जनप्रतिनिधि और अधिकारी मामले को सुलझाने के प्रयास में जुटे हैं।

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