गुरु के दर पर उमड़ी आस्था, रागी जत्थे ने किया कीर्तन, सजे गुरुद्वारे
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गुरुनानक के प्रकाशोत्सव पर वाराणसी जिले में गुरु के दर पर आस्थावानों की कतार लगी। गुरु पर्व पर उत्साह और श्रद्धा के साथ गुरुद्वारा गुरुबाग में सोमवार की सुबह से ही गुरु के चरणों में हाजिरी लगाने के लिए श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हुआ जो देर रात तक जारी रहा। गुरु को नमन करने के साथ ही लंगर लगाया गया। लंगर छक कर गुरु की महिमा का बखान भी हुआ।
श्री गुरुनानक देव के 551वें प्रकाशोत्सव पर श्रद्धालु दर्शन-पूजन के बाद लंगर छककर निहाल हुए। चारों तरफ गुरु का प्रकाश, भक्ति और खुशियां ही खुशियां बिखरीं। गुरुद्वारा परिसर में सुबह से ही गुरु की संगत में शबद कीर्तन का दौर शुरू हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत गुरुघर की संगत पर फूलों की बरसात से हुई। नाम सिमरन, कीर्तन, अखंड पाठ साहिब की शुरुआत हुई।
प्रसाद वितरण के साथ ही आस्थावानों ने सिर झुकाकर गुरु की महिमा का बखान सुना और उनके दर पर सिर नवाकर प्रकाश पर्व मनाया। गुरुद्वारे में सुबह से ही गुरु की महिमा के बखान में संगत जमी और सतगुरु नानक परगटया मिटी धुंध जग चानण होआ और नानक नाम जहाज, जो चढ़े सो उतरे पार आदि भजन और गीतों से संगत को निहाल किया।
सैनिटाइजेशन के बाद मिला प्रवेश
सुबह गुरुद्वारे को सैनिटाइज करने के बाद ही श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया गया। शाम को गुरुद्वारा नीचीबाग के मुख्य ग्रंथी भाई रंजीत सिंह ने कथा द्वारा संगत को निहाल किया। हजूरी रागी गुरुद्वारा नीचीबाग के भाई रकम सिंह एवं गुरुबाग के भाई नरेंदर सिंह ने शबद कीर्तन, गुरुवाणी से संगत को निहाल किया। गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी भाई सुखदेव सिंह ने गुरु ग्रंथ साहिब की हजूरी में प्रार्थना कर कोरोना को समाप्त करने की प्रार्थना की।