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Varanasi News: वनवास समाप्ति के बाद चारों भाइयों का मिलन देख सजल हो गईं आंखें
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- लाटभैरव भरत मिलाप में निकले लाग विमान, हुई पुष्पवर्षा
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। श्री आदि रामलीला लाटभैरव वरुणा संगम काशी की सुप्रसिद्ध भरतमिलाप की लीला रविवार देर रात राजघाट (भैसासुर त्रिमुहानी) पर हुई। लीलाप्रेमियों ने रामचंद्र की जय, लखनलाल की जय, चारों भाइयों की जय और हर हर महादेव... के जयघोष के बीच चारों भाइयों को जब एक दूसरे के गले मिलते देखा तो भावविभोर हो गए। चारों तरफ से मकानों की दूसरी और तीसरी मंजिलों से भी पुष्प वर्षा होने लगी।
समिति के प्रधानमंत्री कन्हैया लाल यादव एडवोकेट, आचार्य पंडित दयाशंकर त्रिपाठी, केवल कुशवाहा, मनोज यादव, श्याम सुंदर सिंह, कामेश्वर पाठक आदि भारी संख्या में रामलीला समिति के पदाधिकारी, कार्यकर्ता संभ्रात नागरिक भरत मिलाप की उस एक झलक पाने के लिए आतुर थे। मिलाप के पूर्व श्रीराम, लक्ष्मण, जानकी निषादराज आश्रम (धनेसरा मठ) से पुष्पक विमान से भरत मिलाप स्थल राजघाट पहुंचे।
उसी समय अयोध्या (विशेश्वरगंज) की ओर से कुलगुरु वशिष्ठ के साथ भरत और शत्रुघ्न भी पहुंचे। पहले गुरु वशिष्ठ से जयघोषों के बीच राम और लक्ष्मण मिले। उसके बाद भूमि पर पड़े भरत और शत्रुघ्न को जब उठाकर भगवान राम और लक्ष्मण ने गले लगाया तो भातृप्रेम का यह अनूठा दृश्य देखकर खुशी से भक्तों की आंखें छलछला आईं। मिलाप के पश्चात चारों भाई सदल बल अयोध्या (विशेश्वरगंज) आए। उनके साथ मनोहारी शोभायात्रा में विविध लाग व स्वांगों को भी शामिल किया गया था।
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। श्री आदि रामलीला लाटभैरव वरुणा संगम काशी की सुप्रसिद्ध भरतमिलाप की लीला रविवार देर रात राजघाट (भैसासुर त्रिमुहानी) पर हुई। लीलाप्रेमियों ने रामचंद्र की जय, लखनलाल की जय, चारों भाइयों की जय और हर हर महादेव... के जयघोष के बीच चारों भाइयों को जब एक दूसरे के गले मिलते देखा तो भावविभोर हो गए। चारों तरफ से मकानों की दूसरी और तीसरी मंजिलों से भी पुष्प वर्षा होने लगी।
समिति के प्रधानमंत्री कन्हैया लाल यादव एडवोकेट, आचार्य पंडित दयाशंकर त्रिपाठी, केवल कुशवाहा, मनोज यादव, श्याम सुंदर सिंह, कामेश्वर पाठक आदि भारी संख्या में रामलीला समिति के पदाधिकारी, कार्यकर्ता संभ्रात नागरिक भरत मिलाप की उस एक झलक पाने के लिए आतुर थे। मिलाप के पूर्व श्रीराम, लक्ष्मण, जानकी निषादराज आश्रम (धनेसरा मठ) से पुष्पक विमान से भरत मिलाप स्थल राजघाट पहुंचे।
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उसी समय अयोध्या (विशेश्वरगंज) की ओर से कुलगुरु वशिष्ठ के साथ भरत और शत्रुघ्न भी पहुंचे। पहले गुरु वशिष्ठ से जयघोषों के बीच राम और लक्ष्मण मिले। उसके बाद भूमि पर पड़े भरत और शत्रुघ्न को जब उठाकर भगवान राम और लक्ष्मण ने गले लगाया तो भातृप्रेम का यह अनूठा दृश्य देखकर खुशी से भक्तों की आंखें छलछला आईं। मिलाप के पश्चात चारों भाई सदल बल अयोध्या (विशेश्वरगंज) आए। उनके साथ मनोहारी शोभायात्रा में विविध लाग व स्वांगों को भी शामिल किया गया था।
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