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काशी विद्यापीठ में 15 जुलाई से शुरू होंगी परीक्षाएं
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की वार्षिक परीक्षाएं 15 जुलाई से शुरू हो जाएंगी। प्रश्रपत्रों का समय डेढ़ घंटे रहेगा। मौखिक परीक्षा ऑनलाइन होगी। शनिवार को विद्या परिषद की बैठक में परीक्षा समिति की संस्तुतियों को पारित कर दिया गया।
कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में विद्या परिषद की बैठक हुई। इसमें वार्षिक परीक्षाएं 15 से 31 जुलाई तक कराने का निर्णय लिया गया।
सदस्यों ने बहु विकल्पीय एवं ओएमआर आधारित परीक्षा पर असहमति जताई। इसके अलावा ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम को अस्वीकार कर दिया गया। डेढ़ घंटे के प्रश्रपत्र तैयार किए जाएंगे। लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर अधिकतम दो सौ एवं दीर्घ उत्तरीय के अधिकतम चार सौ शब्दों में उत्तर देना होगा।
स्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों को प्रोन्नत किया जाएगा तथा 2022 में होने वाली द्वितीय वर्ष की परीक्षा के अंकों के आधार पर उनके प्रथम वर्ष का परिणाम एवं अंक निर्धारित किया जाएगा। द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के छात्रों को राष्ट्रगौरव एवं पर्यावरण की परीक्षा देनी होगी। स्नातक एवं स्नातकोतर प्रथम सेमेस्टर एवं अंतिम सेमेस्टर की समस्त प्रश्रपत्रों की परीक्षाएं होंगी। स्नातक द्वितीय, चतुर्थ तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों को उनके प्रथम व तृतीय सेेमेस्टर के आधार पर अंक प्रदान कर प्रोन्नत किया जाएगा। बैठक में कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य, सहायक कुलसचिव हरीशचंद्र, प्रो. योगेेंद्र सिंह, प्रो. संतोष गुप्ता, प्रो. अशोक मिश्र, प्रो. रंजन कुमार, प्रो. सत्या सिंह, प्रो. ब्रजेश कुमार, प्रो. ओमप्रकाश सिंह मौजूद रहे।
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ओएमआर से होगी एमबीए की परीक्षा
विधि की परीक्षा बार काउंसिल आफ इंडिया के निर्देश के अनुसार होगी। एमबीए चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं पूर्व की भांति ओएमआर पद्धति से होगी। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए आवश्यकतानुसार परीक्षा केंद्र बढ़ाए जाएंगे।
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अंक सुधार का हर छात्र को मौका
कोरोना संक्रमण के कारण यदि किसी छात्र की परीक्षा छूट जाती है तो छात्र को विशेष परीक्षा में सम्मिलित होने का अवसर दिया जाएगा। ऐसे छात्र जो परीक्षा के घोषित परिणाम से संतुष्ट नहीं होंगे, वे वर्ष 2022 में होने वाली बैक पेपर परीक्षा अथवा 2022-23 में होने वाली वार्षिक व सेमेस्टर परीक्षा के सभी या किसी भी विषय में शामिल होकर अंकों में सुधार कर सकते हैं।
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कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में विद्या परिषद की बैठक हुई। इसमें वार्षिक परीक्षाएं 15 से 31 जुलाई तक कराने का निर्णय लिया गया।
सदस्यों ने बहु विकल्पीय एवं ओएमआर आधारित परीक्षा पर असहमति जताई। इसके अलावा ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम को अस्वीकार कर दिया गया। डेढ़ घंटे के प्रश्रपत्र तैयार किए जाएंगे। लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर अधिकतम दो सौ एवं दीर्घ उत्तरीय के अधिकतम चार सौ शब्दों में उत्तर देना होगा।
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स्नातक प्रथम वर्ष के छात्रों को प्रोन्नत किया जाएगा तथा 2022 में होने वाली द्वितीय वर्ष की परीक्षा के अंकों के आधार पर उनके प्रथम वर्ष का परिणाम एवं अंक निर्धारित किया जाएगा। द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के छात्रों को राष्ट्रगौरव एवं पर्यावरण की परीक्षा देनी होगी। स्नातक एवं स्नातकोतर प्रथम सेमेस्टर एवं अंतिम सेमेस्टर की समस्त प्रश्रपत्रों की परीक्षाएं होंगी। स्नातक द्वितीय, चतुर्थ तथा स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के विद्यार्थियों को उनके प्रथम व तृतीय सेेमेस्टर के आधार पर अंक प्रदान कर प्रोन्नत किया जाएगा। बैठक में कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य, सहायक कुलसचिव हरीशचंद्र, प्रो. योगेेंद्र सिंह, प्रो. संतोष गुप्ता, प्रो. अशोक मिश्र, प्रो. रंजन कुमार, प्रो. सत्या सिंह, प्रो. ब्रजेश कुमार, प्रो. ओमप्रकाश सिंह मौजूद रहे।
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ओएमआर से होगी एमबीए की परीक्षा
विधि की परीक्षा बार काउंसिल आफ इंडिया के निर्देश के अनुसार होगी। एमबीए चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं पूर्व की भांति ओएमआर पद्धति से होगी। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए आवश्यकतानुसार परीक्षा केंद्र बढ़ाए जाएंगे।
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अंक सुधार का हर छात्र को मौका
कोरोना संक्रमण के कारण यदि किसी छात्र की परीक्षा छूट जाती है तो छात्र को विशेष परीक्षा में सम्मिलित होने का अवसर दिया जाएगा। ऐसे छात्र जो परीक्षा के घोषित परिणाम से संतुष्ट नहीं होंगे, वे वर्ष 2022 में होने वाली बैक पेपर परीक्षा अथवा 2022-23 में होने वाली वार्षिक व सेमेस्टर परीक्षा के सभी या किसी भी विषय में शामिल होकर अंकों में सुधार कर सकते हैं।