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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Every year 200 children suffering from cancer treated in BHU 60% of them have only blood cancer

Exclusive: बीएचयू में हर साल 200 कैंसर पीड़ित बच्चों का इलाज, इनमें 60 फीसदी केवल ब्लड कैंसर; वजह जान लें

Mon, 01 Sep 2025 12:11 PM IST
प्रगति चंद रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी।
रबीश श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Mon, 01 Sep 2025 12:11 PM IST
सार

Varanasi News: बीएचयू में हर साल 200 कैंसर पीड़ित बच्चों का इलाज किया जा रहा है। हालांकि तीन साल पहले ये आंकड़ा 150 था। हैरान करने वाली बात ये है कि ब्लड कैंसर के मामले पांच साल में ही 60 फीसदी बढ़ गए।  

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Every year 200 children suffering from cancer treated in BHU 60% of them have only blood cancer
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बच्चों में ब्लड कैंसर मामले तेजी से बढ़े हैं। बीएचयू में हर महीने ब्लड कैंसर के 10 नए बच्चे इलाज कराने आ रहे हैं। इनकी उम्र पांच से 12 साल है। पांच साल पहले तक यह आंकड़ा चार बच्चों तक सीमित रहता था। यानी पांच साल में ही बच्चों में ब्लड कैंसर के मामले 60 फीसदी बढ़ गए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, ब्लड कैंसर की वजह अनुवांशिक है। खान-पान का प्रभाव पड़ा है। खाद्य सामग्री में मिलावट से भी कैंसर के मामले बढ़े हैं।

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काशी के निजी अस्पतालों में भी हर महीने ब्लड कैंसर पीड़ित 25 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। होमी भाभा कैंसर अस्पताल के बाल रोग विभाग में भी ब्लड कैंसर पीड़ित बच्चों का इलाज चल रहा है। यहां देश और प्रदेश के अलग-अलग जिलों के बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। 
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हाल ही में फतेहपुर के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाली दस साल की बच्ची भर्ती कराई गई है। कमजोरी और बुखार के बाद डॉक्टरों ने बच्ची की सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) जांच कराई तो टीएलसी 1.55 लाख मिला। डॉक्टरों ने दूसरी जांच कराई गई तो ब्लड कैंसर की पुष्टि हो गई।
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तीन साल पहले आते थे 150 कैंसर पीड़ित बच्चे

ब्लड कैंसर से पीड़ित बच्चों का बीएचयू के बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेंटर में बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया जाता है। बाल रोग विभाग में हर बुधवार और शनिवार को स्पेशल क्लीनिक भी चलाई जाती है। बाल रोग विभाग की प्रो. विनीता गुप्ता ने बताया कि हर महीने 20 नए बच्चों में कैंसर की पुष्टि हो रही है। इनमें 10 ब्लड कैंसर के रहते हैं। बाकी में ब्रेन ट्यूमर, गले, आंत और फेफड़े और आंख के कैंसर की दिक्कत रहती है। हर साल करीब 200 से ज्यादा कैंसर बच्चों का इलाज हो रहा है। तीन साल पहले ये आंकड़ा 150 था। इन बच्चों की कीमोथेरेपी की जा रही है।

सरकार और संस्थाएं कर रही हैं मदद
आईएमएस बीएचयू के बाल रोग विभाग की प्रो. विनीता गुप्ता ने बताया कि बच्चों में ब्लड कैंसर के मामले बढ़े हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह अनुवांशिक होती है। इलाज में सरकार और कुछ स्वयंसेवी संस्थाएं सहयोग कर रही हैं। बीमारी से बचाव के प्रति लोगों की जागरूकता भी बढ़ी है। जितनी जल्दी बच्चे की जांच कराई जाए, उसके ठीक होने की संभावना उतनी ज्यादा रहती है।

क्या बोले चिकित्सक
ओपीडी में आने वाले जिन बच्चों में कैंसर के लक्षण मिलते हैं उन्हें इलाज के लिए स्पेशल क्लीनिक में भेज दिया जाता है। बच्चों में कैंसर के मामले में बढ़े हैं। इसमें ब्लड कैंसर पीड़ित बच्चों की संख्या 60 फीसदी है। -प्रो सुनील राव, बाल रोग विभाग बीएचयू

मिलावटी खाद्य सामग्री के सेवन से ज्यादा दिक्कत
भारतीय बाल अकादमी के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. अशोक राय ने बताया कि बच्चों में ब्लड कैंसर की समस्या बढ़ी है। ओपीडी में रोज इलाज किया जाता है। हर महीने तीन से चार ब्लड कैंसर पीड़ित मिल जाते हैं। इन बच्चों को इलाज के लिए हायर सेंटर भेजा जाता है। ब्लड कैंसर की सबसे बड़ी वजह मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन है। बच्चे बाजार के खान-पान पर ज्यादा जोर देते हैं। खाद्य सामग्री में रासायनिक तत्व की मिलावट ज्यादा नुकसान पहुंचाती है।

ब्लड कैंसर के ये हैं लक्षण

  • लंबे समय तक बुखार हो, बार-बार एंटी बायोटिक देना पड़े।
  • गले में गिल्टियां हों और ठीक न हों।
  • बच्चे के शरीर में तेजी से खून कम हो, कमजोरी महसूस होना।
  • प्लेटलेट्स में गिरावट।


बीएचयू के बाल रोग विभाग से मिले कैंसर पीड़ित बच्चों के आंकड़े

  • 1 से 5 साल : 25 फीसदी
  • 5 से 12 साल : 60 फीसदी
  • 12 से 16 साल : 15 फीसदी
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